फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi University election of carores

करोड़ों का हुआ दिल्ली यूनिवर्सिटी का चुनाव

Fri, 28 Aug 2015 02:19 AM IST
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 28 Aug 2015 02:19 AM IST
विज्ञापन
Delhi University election of carores

डूसू चुनाव के लिए संगठनों के पैनल अभी घोषित नहीं हुए हैं, फिर भी टिकट के दावेदारों ने प्रचार में अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। टिकट के दावेदार और संगठन तमाम तरह के तरीके अपना रहे हैं। कहीं हस्तलिखित पोस्टर हैं तो कहीं फोन, ईमेल और ह्वाट्स ऐप का सहारा लिया जा रहा है। अभी संगठनों ने अपने पैनल घोषित नहीं किए हैं, इसलिए इसका फायदा भी उन्हें मिल रहा है, क्योंकि यह उनके चुनावी खर्च में शामिल नहीं होगा।

विज्ञापन


डीयू चुनाव के लिए पोस्टरबाजी पूरी दिल्ली में दिख रही है। चुनाव में किस तरह से पैसा बहाया जा रहा है कि इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कैंपस से लेकर दिल्ली के अन्य स्थानों की दीवारें पोस्टर से पटी पड़ी हैं। टिकट पाने के संभावित उम्मीदवार पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। वे बड़ी-बड़ी एसयूवी गाड़ियों में प्रचार के लिए कैंपस पहुंच रहे हैं। अपने नामों की छोटी डायरियां और पेन बांट रहे हैं। उम्मीदवार बनने के बाद छात्रों को लुभाने के लिए उनकी ओर से मनोरंजन पार्कों में यात्रा भी कराई जाती है। कहीं फिल्म दिखाई जाती हैं। डूसू चुनाव खर्च सीमा भले ही पांच हजार रुपये हो, लेकिन सच यह है कि नामांकन से काफी पहले ही कई गुना खर्च हो चुके हैं।
विज्ञापन


संगठनों से जुड़े लोगों की मानें तो उम्मीदवारों के साथ उनके समर्थक होते हैं, जिनका दिनभर का खाने-पीने का खर्च करीब हजार रुपये होता है। इसके अलावा हस्तलिखित पोस्टरों और आने-जाने का खर्च भी करीब तीन-चार हजार रुपये होता है। इन सभी खर्चों को जोड़ा जाए तो यह पांच हजार रुपये से ज्यादा हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एबीवीपी के प्रदेश मंत्री साकेत बहुगुणा कहते हैं कि लिगंदोह कमेटी की सिफारिशों के आधार पर तय की गई चुनावी खर्च सीमा पांच हजार रुपये बिल्कुल व्यावहारिक नहीं है। वह कहते हैं कि जेएनयू में जहां केवल आठ हजार छात्र पढ़ते हैं, वहां भी खर्च पांच हजार और डीयू में जहां एक लाख 27 हजार छात्र पढ़ते हैं, उसके लिए भी पांच हजार रुपये। दिल्ली में एक जगह से दूसरी जगह की दूरी काफी अधिक है। अगर उम्मीदवार अपनी गाड़ी का इस्तेमाल करे तो पेट्रोल ही हजारों का लग जाता है। इसलिए केवल पांच हजार में पूरा चुनाव लड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।


पांच हजार है खर्च सीमा
लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक, उम्मीदवार के लिए चुनाव खर्च सीमा पांच हजार रुपये है, लेकिन हकीकत में उम्मीदवार बनने के बाद उनका एक दिन का खर्च ही 20 हजार से काफी ऊपर पहुंच जाता है। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के चलते केवल हस्तलिखित पोस्टर का ही इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसके लिए कागज और रंग पर ही काफी खर्च आ जाता है। भावी उम्मीदवार हस्तलिखित पोस्टर को ही बड़ी संख्या में प्रिंट करवा लेते हैं, जिस पर काफी खर्चा हो जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed