डीयू के नौ असिस्टेंट प्रोफेसरों का चयन रद्द
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दिल्ली हाईकोर्ट ने चार उम्मीदवारों की याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्ट स्टडीज में नौ असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्त को रद्द कर दिया है।
कोर्ट ने चयन प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की छूट दी है। कोर्ट ने चयन प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिल्ली यूनिवर्सिटी को दिया है।
मामला दिल्ली यूनिवर्सिटी के बुद्धिस्थ स्टडीज में नौ असिस्टेंट प्रोफेसरों की स्थायी नियुक्ति से जुड़ा है। यूनिवर्सिटी ने जनवरी 2012 में सहायक प्रोफेसर के 50 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन दिया था। इनमें से नौ पद बुद्धिस्थ स्टडीज में सहायक प्रोफेसर के थे।
कोर्ट ने यह भी कहा
जस्टिस राजीव शकधर की पीठ ने डॉ. वीना गौर व अन्य की याचिका पर सुनवाई के बाद बुद्धिस्थ स्टडीज में सहायक प्रोफेसर के नौ पदों पर दोबारा चयन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।
पीठ ने अपने निर्देश में कहा है कि जो लोग सहायक प्रोफेसर के तौर पर चयनित हो चुके हैं और विभाग में पढ़ा रहे हैं, चयन प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें न हटाया जाए।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वह काफी सालों से विभाग में अस्थायी अध्यापक के तौर पर पढ़ा रहे थे। इसके बावजूद उन्हें सहायक प्रोफेसर के पद पर नहीं चुना गया जबकि वह इसके लिए सभी जरूरी शर्तों को पूरा करते थे। दिल्ली यूनिवर्सिटी का कहना था कि इन उम्मीदवारों ने स्नातक स्तर पर पचास फीसदी अंक हासिल नहीं किए थे, इसलिए इनका चयन नहीं किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने रखी ये दलील
यूनिवर्सिटी की दलील को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अंकित जैन ने कहा कि सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए संबंधित विषय में स्नातकोत्तर स्तर पर 55 फीसदी अंकों की शर्त रखी गई थी।
इसमें स्नातक स्तर पर पचास फीसदी अंकों की शर्त का कोई जिक्र नहीं था। इसके अलावा इन उम्मीदवारों ने संबंधित विषय में प्रथम श्रेणी में पीएचडी तक उच्च शिक्षा हासिल की है।
यूनिवर्सिटी की स्क्रीनिंग कमेटी ने तीस अप्रैल 2013 को इंटरव्यू के लिए बुलाये जाने वाले उम्मीदवारों की सूची जारी की थी। इस सूची में याचिकाकर्ताओं का नाम नहीं था। पूछताछ के बाद पता चला कि उन्होंने स्नातक स्तर पर पचास फीसदी अंक हासिल नहीं किए थे। इसलिए उन्हें साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया। इन उम्मीदवारों ने जुलाई 2013 में याचिका दायर कर इसे चुनौती दी थी।