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सरकारी कॉलेज में 'गड़बड़ी', कहां जाएं गरीब छात्र?

Thu, 31 Oct 2013 10:19 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 31 Oct 2013 10:19 AM IST
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dehradun government college issue

राजधानी देहरादून में जिस समय केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद दून मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास कर रहे थे, उसी समय कुछ किलोमीटर दूर सैकड़ों छात्र सुस्त सरकारी सिस्टम को कोस रहे थे।

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खामियाजा गरीब छात्रों को उठाना पड़ेगा
आयुर्वेदिक पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए आयोजित अंतिम काउंसिलिंग में गुरुकुल राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज की 50 सीटें शामिल न होने से इन छात्रों को मायूस लौटना पड़ा। इस कॉलेज को तमाम गड़बड़ियों के कारण आयुष परिषद की मान्यता नहीं मिल पाई है। इसका खामियाजा उन गरीब छात्रों को उठाना पड़ेगा जिनके परिजनों के लिए प्राइवेट कॉलेजों की महंगी फीस भरना संभव नहीं है।
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प्रदेश में दो सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज
सहस्त्रधारा स्थित आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं निदेशालय में आयोजित काउंसिलिंग में पहुंचने के बाद छात्रों को इस बात की सूचना मिली। जबकि, विज्ञप्ति में इन सीटों को शामिल किया गया था। वहीं, ऋषिकुल कॉलेज की भी केवल तीन सीटें ही उपलब्ध थीं। प्रदेश में दो ही सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज हैं। इसके अलावा निजी आयुर्वेद कॉलेजों की 31 सीटों और होम्योपैथी कॉलेजों की 22 सीटें काउंसिलिंग में शामिल थीं। जबकि करीब 200 छात्र एडमीशन के लिए पहुंचे थे।
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विरोध का कोई नतीजा नहीं
सीटें कम होने पर छात्रों ने काफी विरोध किया लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। जसपुर ऊधमसिंह नगर से आए अनुज कुमार चौहान ने कहा कि सरकार की गलती की वजह से उनके बच्चे का साल बर्बाद हो गया। रुद्रपुर से आए छात्र जागेंद्र ने कहा कि सरकारी सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा वह क्यों भुगतें। हरिद्वार, रुड़की, किच्छा, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल, ऋषिकेश से आए छात्र और अभिभावक भी सीट न मिलने की वजह से परेशान नजर आए।

अनियमितताओं पर रुकी मान्यता
गुरुकुल कॉलेज का नाम पुराने व प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक कॉलेजों में शुमार होता है। बताया जा रहा है कि जब दिल्ली से टीम निरीक्षण के लिए आई थी तो 14 में से केवल दो प्रोफेसर ही थे। बाकी 12 पद खाली होने की वजह से टीम ने सत्र 2013-14 की मान्यता रोक दी। इसके पीछे सरकारी लापरवाही को माना जा रहा है। समय रहते यदि सभी पद भर लिए जाते तो शायद ऐसा मौका न आता।

छात्रों के लिए बड़ा झटका
राजकीय सीट पर एक साल का खर्च करीब 12500 रुपये है जबकि प्राइवेट कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों पर सालाना 1.25 लाख रुपये से अधिक का बोझ पड़ता है। इस वजह से गरीब तबके के होनहार छात्रों के लिए यह एक झटका है।


प्राइवेट को मिली, सरकारी को नहीं
बीएएमएस व बीएचएमएस की पहली काउंसिलिंग में प्राइवेट हिमालयीय आयुर्वेदिक कॉलेज को भी मान्यता न होने की वजह से शामिल नहीं किया गया था। खास बात यह है कि इस कॉलेज को द्वितीय काउंसिलिंग से पहले मान्यता मिल गई लेकिन राजकीय कॉलेज महरूम रह गया।

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