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डीएवी प्राचार्य ने गिनाई शिक्षकों को मजबूरियां
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 24 Dec 2013 04:08 PM IST
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डीएवी पीजी कालेज में आम सभा का आयोजन किया गया। सभा में शिक्षक और प्राचार्य आमने-सामने थे। इस दौरान प्राचार्य ने डीएवी, डीबीएस और डीडब्ल्यूटी कालेजों को मिलाकर यूनिवर्सिटी बनाने पर हो रहे शिक्षकों के विरोध का जवाब दिया।
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दीन दयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित सभा में प्राचार्य डा. देवेंद्र भसीन ने साफ किया कि कालेज के सभी शिक्षक शासन और प्रबंधन के निर्देश मानने को मजबूर हैं। शिक्षकों ने प्राचार्य के सामने कई मुद्दे उठाए।
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ये है प्रबंधन की शर्त
प्राचार्य ने कहा कि प्रबंधन ने अपने पत्र में विवि के गठन को उसी सूरत में समर्थन देने की घोषणा की है जबकि राजकीय महाविद्यालयों की तर्ज पर 90:10 के अनुपात में अनुदान दिया जाए। साथ ही शिक्षक व कर्मियों का वेतन और सेवा शर्तें यथावत होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि अवस्थापना विकास में 90:10 में अनुदान पर सहमति जताई गई है। शिक्षकों ने सरकार के उस शासनादेश का विरोध किया जिसमें पांच घंटे अनिवार्य पढ़ाने सहित अन्य निर्देश जारी किए गए हैं।
शिक्षकों ने किया विरोध
शिक्षकों ने प्राचार्य से ऐसे किसी भी निर्देश को कालेज में लागू न करने की मांग की। इस पर प्राचार्य ने कहा कि वह प्रबंधन और राज्य सरकार का हर निर्णय मानने को बाध्य हैं। वह प्रत्येक आदेश लागू करने के लिए पूरा प्रयास करेंगे। सभा में भारी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।
छात्रों को राजनीति की फिक्र
आम सभा के बाद कुछ छात्र नेता भी प्राचार्य के पास पहुंचे। नेताओं को इस बात की चिंता थी कि यदि रूसा के तहत डीएवी यूनिवर्सिटी में शामिल हो गया तो उनका क्या होगा।
इस पर प्राचार्य ने रूसा से जुड़े एक पदाधिकारी से वार्ता की। उन्होंने बताया कि इससे उनके लिए कोई दिक्कत पैदा नहीं होगी। यूनिवर्सिटी का गठन सिर्फ अकादमिक आजादी के लिए है जिससे नए-नए कोर्स शुरू किए जा सकेंगे।