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डीएलएड प्रशिक्षणार्थियों के भविष्य पर संकट

Mon, 02 Mar 2015 01:53 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 02 Mar 2015 01:53 PM IST
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D.L.ed trainee facing problem.

उत्तराखंड में प्राथमिक शिक्षकों की अनिवार्य योग्यता के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा तय पाठ्यक्रम डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) में प्रशिक्षण ले रहे 450 युवाओं के भविष्य पर तलवार लटक गई है।

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एनसीटीई ने 18 फरवरी को जयपुर में र्हुई बैठक में प्रदेश के 13 में से चार जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के मान्यता आवेदन निरस्त कर दिए हैं। दो को चेतावनी दी गई है, जबकि तीन की मान्यता पर निरीक्षण के बाद निर्णय होगा।
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इनके आवेदन निरस्त
नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, रुड़की (हरिद्वार) और अल्मोड़ा

इन्हें चेतावनी
चमोली और रुद्रप्रयाग
यहां होगा निरीक्षण
उत्तरकाशी, चंपावत और देहरादून

ये डायट ठीक
पौड़ी, बागेश्वर, टिहरी, पिथौरागढ़

बिना मान्यता कर दिए दाखिले

D.L.ed trainee facing problem.

उत्तराखंड में डीएलएड परीक्षा उत्तराखंड बोर्ड की ओर से कराई गई। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने परीक्षा से पूर्व एनसीटीई को डायटों की मान्यता के लिए आवेदन भेजा था।

एनसीटीई ने परिषद को डायटों में मिली कमियां गिनाते हुए इन्हें दूर करने पर जवाब मांगा, लेकिन परिषद ने इसके बाद संपर्क नहीं किया। इस बीच डीएलएड की मान्यता लिए बिना सिर्फ बीटीसी की मान्यता के आधार पर युवाओं को दाखिले दे दिए गए। अब मान्यता नहीं मिली तो प्रशिक्षणार्थी अधर में लटक जाएंगे।

हर डायट में 50 सीट

प्रदेश के 13 डायटों में प्रत्येक में दो वर्षीय डीएलएड की 50-50 (कुल 650) सीटें हैं। प्राथमिक शिक्षक के लिए बीएड के बजाय डीएलएड की अनिवार्यता के बाद गत वर्ष प्रदेश में हुई परीक्षा के लिए युवाओं में खासा उत्साह दिखा था। 650 पदों के लिए 55 हजार ने परीक्षा दी थी।

न तो हमें एनसीर्टीई की इस मीटिंग में बुलाया गया था और न ही अभी तक मान्यता के आवेदन निरस्त होने संबंधी कोई पत्र मिला है। अगर ऐसा कुछ हुआ है तो हम एनसीटीई से इस संबंध में बात करेंगे।
- आरडी शर्मा, अपर निदेशक, एससीईआरटी

हम पहले से ही सवाल उठा रहे हैं। अगर बीटीसी को आधार बनाकर ही डीएलएड में दाखिले देने थे तो एनसीटीई में आवेदन क्यों किया? आवेदन किया था तो मान्यता मिलने से पहले दाखिले क्यों दिए? आवेदन निरस्त हुआ तो युवाओं से बड़ा खिलवाड़ होगा।
- सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, एसोसिएशन आफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट

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