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नर्सरी दाखिला: कोटे पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Fri, 21 Feb 2014 09:19 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 21 Feb 2014 09:19 PM IST
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court seeks reply on nursery admission reservation

नर्सरी दाखिलों में विकलांग बच्चों के लिए आरक्षित कोटे को भी आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों के कोटे में जोड़ने संबंधी उपराज्यपाल के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत ने केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट्ट व न्यायमूर्ति आरवी इश्वर की खंडपीठ ने मानव संसाधन मंत्रालय व दिल्ली सरकार शिक्षा विभाग को 25 फरवरी तक स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों व याचिका स्वीकार कर ली जाए।
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दायर जनहित याचिका में सभी सहायता व गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में विकलांग बच्चों के लिए तीन प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने का निर्देश देने का आग्रह किया है।
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जनहित याचिकाकर्ता प्रमोद अरोड़ा के अधिवक्ता कीर्ति उप्पल ने 18 दिसंबर 2013 को उपराज्यपाल द्वारा नर्सरी दाखिलों के संबंध में जारी दिशा निर्देश को रद्द करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा उपराज्यपाल के आदेश से विकलांग बच्चों के अधिकारों व शिक्षा पाने के अधिकार का हनन हुआ है।

वहीं, दिल्ली सरकार की अधिवक्ता जुबेदा बेगम ने उपराज्यपाल से इस मुद्दे पर सलाह लेकर जवाब दाखिल करने का तर्क रखा।

अधिवक्ता उप्पल ने तर्क रखा कि आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चे भी विशेष सहायता पाने के हकदार है लेकिन उससे भी ज्यादा सहायता विकलांग बच्चों को मिलनी चाहिए। उन्होंने पहले से विकलांग बच्चों के लिए दाखिलों में तीन प्रतिशत सीटें आरक्षित थी लेकिन अब सभी सीटें मिला दी गई है।

उन्होंने कहा हर स्कूल में कमजोर वर्ग के बच्चों के चार-चार आवेदन आने के बाद आवेदन लेने की प्रक्रिया बंद कर दी गइ। वहीं विकलांग बच्चों के आवेदन मात्र 15 के करीब ही आए है। ऐसे में लाटरी सिस्टम से दाखिलें प्रदान करने की प्रक्रिया में विकलांग बच्चे दाखिलों से पिछड़ जाएंगे।


इस प्रकार हर बच्चे के निशुल्क व जरूरी शिक्षा के अधिकार का हनन होगा। इसके अलावा 237 स्कूलों के प्राप्त डाटा के अनुसार मात्र 43 में ही विकलांग बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के पूरे प्रबंध है। ऐसे में इन स्कूलों में भी उन्हें दाखिला नहीं मिल पाएगा। उन्होंने अदालत से नए दिशा निर्देश को रद्द कर विकलांग बच्चों के लिए तीन प्रतिशत सीटे आरक्षित करने का निर्देश देने का आग्रह किया है।

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