फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   corporal punishment is ban in schools

छात्रों को पीटने वाले शिक्षकों पर होगी कार्रवाई

Fri, 25 Apr 2014 09:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 25 Apr 2014 09:14 AM IST
विज्ञापन
corporal punishment is ban in schools

सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में शिक्षकों द्वारा बच्चों को शारीरिक दंड देना भारी पड़ेगा। शारीरिक दंड देने की शिकायत मिलने पर शिक्षक और स्कूल केखिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।

विज्ञापन


मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 केतहत शिक्षा निदेशालय को शारीरिक दंड खत्म करने केलिए गाइडलाइंस जारी की गई है। निदेशालय ने इन गाइडलाइंस को सभी स्कूलों को भेज दिया है।
विज्ञापन


शिक्षा निदेशालय की अतिरिक्त शिक्षा निदेशक (आरटीई) मधु रानी तेवतिया ने इस संबंध में स्कूलों को सलाह जारी की है। गाइडलाइंस में आरटीई एक्ट केसेक्शन 17 (1) का हवाला देते हुए कहा गया है कि बच्चों को शारीरिक दंड देना व मानसिक उत्पीड़न निषेध है। जो भी इसका उल्लंघन करेगा, उसकेखिलाफ सेवा नियमों केतहत अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


आरटीई केसेक्शन आठ व नौ का हवाला देते हुए स्कूलों को कहा गया है कि गरीब और वंचित वर्ग केबच्चों केसाथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाए। ना ही उन्हें भेदभाव के आधार पर पढ़ाई से रोका जा सकता है और ना ही शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न किया जा सकता है।


स्कूलों को शारीरिक दंड केदूरगामी परिणाम भी बताए गए हैं। स्कूलों को बताया गया है कि यदि शारीरिक दंड दिया जाता है तो बच्चों में विनाशकारी व्यवहार उत्पन्न हो सकता है। उसकी पढ़ाई की क्षमता पर असर होगा, आत्मसम्मान की भावना कम होगी, अवसाद की बढ़ोतरी होगी, शिक्षकों केखिलाफ प्रतिशोध की भावना आ सकती है। लिहाजा स्कूलों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि बच्चों को शारीरिक दंड ना दिया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed