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कॉलेज 20 रुपये में कैसे कराएं प्रैक्टिकल?

Sat, 23 Aug 2014 01:29 PM IST
शैलेष अरोड़ा/अमर उजाला, लखनऊ
शैलेष अरोड़ा/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 23 Aug 2014 01:29 PM IST
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condition of practical in aided colleges of lucknow.

बढ़ती महंगाई और सरकार की लापरवाही शिक्षा पर भी भारी पड़ रही है। एडेड डिग्री कॉलेजों में प्रैक्टिकल के लिए सरकार की ओर से तय शुल्क 2005 के अनुसार 240 रुपये है।

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नौ साल पहले तय की गई इस राशि पर आज के समय प्रयोगात्मक कक्षाएं कराना एडेड डिग्री कॉलेजों के लिए चुनौती बन गया है।

यही कारण है कि विज्ञान के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने की चाह रखने वाले स्टूडेंट्स बगैर प्रयोग किए ही पढ़ाई कर रहे हैं।

कॉलेजों के प्राचार्यों का कहना है कि प्रैक्टिकल कम होने के पीछे सरकार जिम्मेदार है। सरकार ने अब तक रेट रिवाइज नहीं किए हैं, जिस कारण पहले जैसी व्यवस्था अब कर पाना संभव नहीं है।
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पिछले नौ वर्षों के दौरान साइंस की प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स के दामों में कई गुना वृद्धि हुई है। कई केमिकल ऐसे हैं, जिनके दाम इन वर्षों में पांच गुना से भी ज्यादा बढ़ गए हैं लेकिन एडेड कॉलेजों में प्रैक्टिकल के लिए स्टूडेंट्स से जो शुल्क लिया जाता है वह आज भी 2005 का निर्धारित है।
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यही कारण है कि कॉलेजों ने प्रैक्टिकल की संख्या कम कर दी है। पहले छह से आठ प्रयोगात्मक कक्षाएं होती थीं तो अब मुश्किल दो या तीन ही कक्षाएं हो पाती हैं।

इसके अलावा कई कॉलेजों में स्टूडेंट्स से प्रैक्टिकल की जो फीस ली जाती है, उसका भी मात्र 15-20 परसेंट ही संबंधित विभाग तक पहुंचता है।

ऐसे में विभाग न तो केमिकल खरीद पाते हैं और न ही सही से प्रैक्टिकल होते हैं। इसका बड़ा कारण है अधिक मुनाफा कमाना।

इन कॉलेजों का फीस स्ट्रक्चर सरकार की ओर से निर्धारित होने की वजह से आय के जरिए कम हैं। ऐसे में प्रैक्टिक्ल की फीस बचाकर यह अपनी आय बढ़ाने का प्रयास करते हैं।

कम हुई एडेड कॉलेजों में केमिकल की खरीद
कॉलेजों में प्रैक्टिकल की संख्या कम होने का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि राजधानी में केमिकल्स के विक्रेताओं के यहां दाम बढ़ने के साथ ही केमिकल्स की बिक्री कम हो रही है। कुछ दुकानदारों ने बताया कि शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ने से बिक्री होती है।


वरना यदि एडेड कॉलेजों की बात करें तो उनकेयहां होने वाली सप्लाई पहले से काफी कम है। बिना कॉलेजों का नाम लिए शहर के एक नामी विक्रेता ने बताया कि पहले जितनी सप्लाई वह एडेड कॉलेज को किया करते थे, अब उसकी आधी ही रह गई है।

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