शिक्षकों ने ही खोली विश्वविद्यालय की पोल!
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कॉलेज शिक्षकों ने विश्वविद्यालय पर सेकंड सेमेस्टर की आंसरशीट्स की गोपनीयता भंग करने का आरोप लगाया है। आरोप लगाया कि विवि प्रबंधन ने कॉलेजों से आंसरशीट आवंटन को गोपनीय नहीं रखा।
संबंधित कॉलेजों को इस बात की जानकारी है कि उनके कॉलेजों की उत्तर पुस्तिकाएं किस कॉलेज को भेजी गई हैं। उनके यहां किन कॉलेजों से आई हैं। आंसरशीट से स्टूडेंट्स के ओरिजिनल रोलनंबर हटाकर एफआर नंबर (फिक्टिशियस नंबर) भी नहीं लगाए गए हैं।
आरोप लगाया है कि कॉलेजों की आंसरशीट्स का आवंटन नजदीक के कॉलेजों में किया गया। उन्होंनेे विवि प्रबंधन को चेतावनी दी है कि एक सितंबर को उनके साथ हुई बैठक के निर्णयों को लागू नहीं किया गया तो वे पेपरों का मूल्यांकन नहीं करेंगे।
फैसले लिए, मगर लागू नहीं
नहीं मिले डाटा ऑपरेर्ट्स, कॉलेज के वरिष्ठ शिक्षक की उपस्थिति में नहीं हो रही डाटा एंट्री, पुराने पैट्रन पर नहीं लगाई शिक्षकों की ड्यूटियां, नजदीकी कॉलेजों में ही बांटे आंसरशीट्स के बंडल, बैठक के मिनट्स साइट पर नहीं डाले गए।
बचाव में उतरे विवि अधिकारी
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सीईओ प्रो. श्याम लाल ने कहा कि गोपनीयता भंग करने का आरोप गलत है। बंडलों से कॉलेजों के नाम हटाए गए थे। बैठक में लिए निर्णयों को लागू कर दिया है। फिर भी शिक्षकों को किसी तरह की आपत्ति है तो उसके बारे में सूचित करें, ताकि मसलों को हायर अथॉरिटी तक पहुंचाया जा सके।
झूठ बोल रहे हैं सीओई
प्रदेश कॉलेज शिक्षक संघ अध्यक्ष डा. आरके कायस्था ने कहा कि प्रो. वाइस चांसलर की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए निर्णयों को अभी तक लागू नहीं किया गया है। सीओई उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता, निर्णयों को लागू करने को लेकर झूठ कह रहे हैं। यूनिवर्सिटी के इस रवैये के चलते शिक्षक पेपरों का मूल्यांकन का कार्य रोकने जा रहे हैं।