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दो महीने में ही तैयार हुई कॉलेज की इमारत

Mon, 16 Sep 2013 10:36 AM IST
अमर उजाला, आफताब अजमत, देहरादून
अमर उजाला, आफताब अजमत, देहरादून Updated Mon, 16 Sep 2013 10:36 AM IST
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college building ready in only 2 month

कॉलेज, नाम सुनते ही जेहन में लंबी चौड़ी ईंट, बजरी, सीमेंट से बनी भव्य, ऊंची इमारत की तस्वीर उभरती है। कोई पूछे कि किसी कॉलेज के निर्माण में कितना वक्त लगता है तो जाहिर तौर पर जवाब होगा एक से तीन-चार साल। लेकिन अगर हम कहें कि कोई कॉलेज सिर्फ दो माह में तैयार हो सकता है तो?

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जी हां, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) ने प्रदेश का पहला प्री फैब्रीकेटेड कॉलेज भवन तैयार किया है, जिसमें अब महिला तकनीकी संस्थान (डब्लूआईटी) का कैंपस चल रहा है।
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सुद्ध्रोवाला स्थित यूटीयू परिसर में घुसते ही मुख्य भवन के बगल में टिन शेड की नई इमारत नजर आती है। यही डब्लूआईटी है। भवन की खासियत यह है कि बुनियाद से ऊपर यह पूरी तरह पॉली विनाइल क्लोराइड (पीवीसी) का बना है।
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निर्माण करने वाली कंपनी ने रेडीमेड दीवारों के ऊपर खास तकनीक वाली टिन शेड लगाई है। एक मंजिला भवन में अंतिम चरण का काम चल रहा है, लेकिन कक्षाओं का संचालन शुरू हो चुका है। कालेज में पांच ब्रांच हैं, इसके लिए पांच कमरे तैयार हो चुके हैं।

हर साल छात्राओं की संख्या बढ़ने के साथ कमरों की संख्या बढ़ती जाएगी। कक्षाओं के सामने पांच लैब (फिजिक्स, कैमिस्ट्री, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर और मैकेनिकल) बनाई जा रही है। यही नहीं, विवि गोपेश्वर में बन रहे अपने इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का निर्माण भी इसी तकनीक से करा रहा है।

40 प्रतिशत तक सस्ता
तकनीकी विवि ने इस तकनीक को एडॉप्ट करने के पीछे तर्क दिया है कि यह ईंट और सीमेंट से बनी इमारत से 40 प्रतिशत सस्ता होता है। मसलन, अगर किसी ईंट, बजरी, सरिया व सीमेंट के कमरे का खर्च एक लाख रुपये आता है, तो प्री फैब्रीकेटेड कमरा महज 60 हजार रुपये में तैयार हो जाएगा।

उन्नत प्लास्टिक है पीवीसी
डीएवी कालेज में रयासन विज्ञान के प्रोफेसर डा. देवेंद्र त्यागी ने बताया कि पीवीसी भी प्लास्टिक ही है, लेकिन यह कुछ उन्नत किस्म की होती हे। रासायनिक प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद पीवीसी आम प्लास्टिक की तुलना में अधिक लचीली होती है, जिससे दीवारों पर दरारें कम आती हैं और उम्र अधिक होती है।

ऐसे बनता है भवन
भवन की बुनियाद ईंटों से तैयार की जाती है। इसके बाद फर्श तैयार किया जाता है और फिर विशेषज्ञ प्री फैब्रीकेटेड ढांचा खड़ा कर देते हैं। इसके बाद दीवारों पर बिजली की फिटिंग कर दी जाती है और भवन तैयार। ऐसे भवन भूकंपरोधी होते हैं, जिनकी उम्र विशेषज्ञ 25 साल बताते हैं।


किसी कालेज की इमारत बनने में कम से कम एक वर्ष का वक्त लगता है। ऐसे में प्री फैब्रीकेटेड बिल्डिंग कम समय और खर्च में बेहतर विकल्प है। आधुनिक तकनीक युक्त इस भवन की छत कम तपती है।
-डा. आशीष उनियाल, उप कुलसचिव, यूटीयू

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