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पीयू में छात्र नेताओं और सिक्योरिटी के बीच झड़प

Tue, 03 Jun 2014 09:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 03 Jun 2014 09:40 AM IST
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Clash between PU Security and Student Leaders

पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस में सोमवार को छात्र संगठन और पीयू प्रशासन के बीच टकराव हो गया। अपनी मांगों को लेकर विरोध कर रहे विद्यार्थियों की अनुशासनहीनता पर पीयू प्रशासन ने मामले में पुलिस में 4-5 विद्यार्थियों के खिलाफ डीडीआर दर्ज कराने की चिट्ठी लिख डाली। इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संगठनों ने विरोध जताया है।

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घटना दोपहर 12 बजे की है। पीयू कुलपति दफ्तर के सामने स्टूडेंट फॉर सोसाइटी(एसएफएस) छात्र नेता रमन अपने 20 समर्थकों के साथ पीयू की ओर से एमफिल और पीएचडी एंट्रेंस टेस्ट हिंदी और पंजाबी भाषा में लेने का ज्ञापन देने पहुंचे। सिक्योरिटी कर्मचारियों ने विद्यार्थियों को दफ्तर के अंदर जाने से रोका। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन तेज हो गया।
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एसएफएस के 3-4 स्टूडेंट वीसी दफ्तर गेट को फांदते हुए वीसी दफ्तर के अंदर चले गए। काफी देर तक पीयू सिक्योरिटी और छात्रों के बीच जमकर खींचतान होती रही। मामला गंभीर होता देख काफी संख्या में पुलिस भी बुला ली गई। बाद में एसएफएस के प्रोटेस्ट में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया(एसएफआई) भी शामिल हो गई।
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छात्रों के खिलाफ डीडीआर दर्ज कराएगा पीयू

Clash between PU Security and Student Leaders
वीसी दफ्तर में जबर्दस्ती एंट्री करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने पुलिस में डीडीआर दर्ज कराने का फैसला लिया है। पहली बार पीयू प्रशासन ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन पर ऐसा सख्त कदम उठाया है।

डीएसडब्ल्यू प्रो.नवदीप गोयल की ओर से जबर्दस्ती गेट लांघने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ पुलिस में कार्रवाई की मांग की गई है। पूरे मामले की रिकार्डिंग पुलिस को सौंप दी गई है। जिसे देखने के बाद विद्यार्थियों के खिलाफ डीडीआर दर्ज करने को कहा गया है।

प्रो.नवदीप गोयल का कहना है कि मीडिया में खुद को हाईलाइट कराने के लिए विद्यार्थियों को इस तरह के हथकंडे नहीं अपनाने चाहिए। उधर छात्रों पर डीडीआर दर्ज कराने के मामले के बाद अन्य छात्र संगठन भी एकजुट होकर मंगलवार को प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

डीयूआई ने सभी हेड से मांगी रिपोर्ट

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एमफिल और पीएचडी एंट्रेंस हिंदी और पंजाबी में लिए जाने को लेकर सोमवार दोपहर हुए हंगामे के बाद दोपहर बाद डीयूआई प्रो.एके भंडारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्ट्स संकाय के चेयरपर्सन, हेड की ज्वाइंट मीटिंग करने के आदेश जारी किए हैं।

इसमें विद्यार्थियों की मांग पर विमर्श करने की बात कही है। डीयूआई ने 11 जून तक मीटिंग की मिनट्स भेजने के आदेश दिए गए हैं।

फाइल दबाए बैठे हैं डीयूआई

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बीए स्तर पर पंजाब यूनिवर्सिटी बाहरी विद्यार्थियों को पंजाबी विषय में एडिशनल विषय की परीक्षा देने की अनुमति देती है। स्टूडेंट काउंसिल की ओर से हिंदी और अंग्रेजी के विद्यार्थियों को भी यह सुविधा देने के लिए कई बार डीयूआई प्रो.भंडारी और कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन को ज्ञापन दिया।

5 महीने बीतने के बाद भी डीयूआई मामले में कमेटी की मीटिंग नहीं करा सके। आखिर में उन्होंने अपने स्तर पर ही मामले में कार्रवाई की बात कही। लेकिन करीब महीने भर से फाइल डीयूआई की टेबल पर पड़ी है। ग्रेजुएशन स्तर की परीक्षाएँ भी खत्म हो गई, लेकिन पीयू के अधिकारी 6 महीने बीतने के बाद भी कोई फैसला नहीं ले सके।

ये कहना है छात्र नेता का

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पीयू प्रशासन द्वारा हिंदी और पंजाबी भाषा के साथ भेदभाव लोकतांत्रिक हितों से खिलावड़ है। पीयू प्रशासन ने अगर अड़ियल रवैया अपनाया तो छात्र संगठन मिलकर संघर्ष तेज करेंगे।
प्रभप्रीत सिंह (प्रेसिडेंट स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया)

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