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प्लास्टिक की बोतलों से बनेंगे सस्ते, बुलेटप्रूफ घर
अमर उजाला, मोहाली
Updated Mon, 06 Jan 2014 11:29 AM IST
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क्वेस्ट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के विद्यार्थियों ने बेकार प्लास्टिक की बोतलों से एक नई तकनीक तैयार की है। जो आने वाले दिनों में भवन निर्माण में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
इस तकनीक से बनने वाली चीजें जहां बुलेटप्रूफ होंगी। वहीं, इनसे पर्यावरण भी प्रदूषित होने से बचेगा। इसके अलावा यह लोगों के बजट में भी रहेगी।
संस्थान के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों ने अध्यापक हिमांशु शर्मा एवं वरुण शर्मा की देखरेख में प्रोजेक्ट तैयार किया। उन्होंने प्लास्टिक की बोतलों में रेत भरकर उन्हें अंदर से काफी मजबूत कर दिया।
जहां एक ईंट की मजबूती 3 किलो भार तक की होती है। रेत भरने के बाद एक बोतल की मजबूती 75 किलो तक हो गई। यह तपिशरोधी भी होती है।
उन्होंने बताया कि बोतलों का यह ढांचा बुलेट प्रूफ भी है। इस कारण इनका उपयोग बंकर बनाने के लिए भी किया जा सकता है।
प्रोजेक्ट में काम कर रहे विद्यार्थी अमित राणा ने बताया कि उन्होंने 1170 एक साइज की प्लास्टिक की बोतलों से एक बैठने वाली सीट का निर्माण किया। हर प्लास्टिक की बोतल में रेत भरकर उनकी मजबूती को कई गुणा बढ़ा दिया।
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इसके बाद 5 बोरी सीमेंट, 1521 किलो रेत, 4 किलो सफेद सीमेंट, 2 किलो किचन चिप्स, 310 मीटर नाइलन की रस्सी व 150 मिली सटेनर के उपयोग से इस लंबी सीट का निर्माण किया। यह सीट उन्हें लगभग 6200 रुपये में पड़ी।
जबकि ईंटों से बनी इस सीट की कीमत 10000 रुपये से अधिक होती। प्रोजेक्ट में विद्यार्थी आशीष विरदी, अमित राणा, अमित कुमार, रजत गर्ग, नवीन राणा, अमित गौतम शामिल थे।
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इस तकनीक से बनने वाली चीजें जहां बुलेटप्रूफ होंगी। वहीं, इनसे पर्यावरण भी प्रदूषित होने से बचेगा। इसके अलावा यह लोगों के बजट में भी रहेगी।
संस्थान के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों ने अध्यापक हिमांशु शर्मा एवं वरुण शर्मा की देखरेख में प्रोजेक्ट तैयार किया। उन्होंने प्लास्टिक की बोतलों में रेत भरकर उन्हें अंदर से काफी मजबूत कर दिया।
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जहां एक ईंट की मजबूती 3 किलो भार तक की होती है। रेत भरने के बाद एक बोतल की मजबूती 75 किलो तक हो गई। यह तपिशरोधी भी होती है।
उन्होंने बताया कि बोतलों का यह ढांचा बुलेट प्रूफ भी है। इस कारण इनका उपयोग बंकर बनाने के लिए भी किया जा सकता है।
प्रोजेक्ट में काम कर रहे विद्यार्थी अमित राणा ने बताया कि उन्होंने 1170 एक साइज की प्लास्टिक की बोतलों से एक बैठने वाली सीट का निर्माण किया। हर प्लास्टिक की बोतल में रेत भरकर उनकी मजबूती को कई गुणा बढ़ा दिया।
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इसके बाद 5 बोरी सीमेंट, 1521 किलो रेत, 4 किलो सफेद सीमेंट, 2 किलो किचन चिप्स, 310 मीटर नाइलन की रस्सी व 150 मिली सटेनर के उपयोग से इस लंबी सीट का निर्माण किया। यह सीट उन्हें लगभग 6200 रुपये में पड़ी।
जबकि ईंटों से बनी इस सीट की कीमत 10000 रुपये से अधिक होती। प्रोजेक्ट में विद्यार्थी आशीष विरदी, अमित राणा, अमित कुमार, रजत गर्ग, नवीन राणा, अमित गौतम शामिल थे।