{"_id":"db4e262eb5015f35e3967a9826ef5d44","slug":"chandigarh-dpi-on-poor-result-of-govt-schools","type":"story","status":"publish","title_hn":"DPI बोले, खराब रिजल्ट के लिए अभिभावक हैं जिम्मेवार ","category":{"title":"Campus Archives","title_hn":"कैंपस आर्काइव","slug":"campus-archives"}}
DPI बोले, खराब रिजल्ट के लिए अभिभावक हैं जिम्मेवार
रूबी सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 03 Jun 2014 02:20 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीपीआई कमलेश कुमार भादू कहते हैं कि अभिभावकों की लापरवाही के कारण सरकारी स्कूलों का रिजल्ट खराब आया। मैं खुद पढ़ने-लिखने में बहुत बेकार था।
विज्ञापन
जब मैं छोटा था, तो मेरे खुद के स्कूल बैग से एक बार चूहा निकला था, क्योंकि मैंने अपना बैग स्कूल से आने के बाद घर जाकर देखा ही नहीं था। अगले दिन क्लास में जाकर बैग खोला तो उसमें से चूहा निकला। मेरा खुद बचपन ऐसे ही निकला है। इसलिए मैं अपने बचपन के अनुभव से बच्चों की मानसिकता को समझ सकता हूं।
विज्ञापन
हंसते हुए अपने स्कूली दिनों का यह वाकिया डीपीआई कमलेश कुमार भादू ने बताया। जिन्होंने बोर्ड की परीक्षा के दौरान सरकारी स्कूलों में आए खराब परिणाम का अधिक जिम्मेवार शिक्षकों की बजाए अभिभावकों को बताया।
विज्ञापन
उन्होंने यहां तक कह दिया कि खराब रिजल्ट के लिए उन्होंने प्रिंसिपल की बैठक बुलाई और कारण भी पूछा है, लेकिन इससे अधिक वे क्या करें, वह खुद नहीं जानते।
सोमवार को डीपीआई ने स्कूलों के विकास और उनकी योजनाओं पर अमर उजाला के साथ मुलाकात की, लेकिन इस साल स्कूलों में क्या विकास होने वाला है, वह इस संबंध में अधिक बताने की बजाए अभिभावक की सोच और एनजीओ से मदद की बात अधिक कहते हुए नजर आए।
मां नहीं देखती बैग, तो कैसे पढ़ेंगे बच्चे
डीपीआई कमलेश कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में मां अपने बच्चों के स्कूल बैग नहीं देखती है। उनकी किताबें चैक नहीं करती है, तो कैसे बच्चे पढ़ाई करेंगे। वे खुद मानते हैं कि स्कूल से जाने के बाद मां को अपने बच्चों को पास बैठाकर पढ़ाना चाहिए।
बैठक से ज्यादा क्या करना है अभी पता नहीं
दसवीं एवं बारहवीं कक्षा के परिणाम खराब आने पर क्या कार्रवाई की है। इस सवाल पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि प्रिंसिपल के साथ बैठक की है, उनसे कारण भी पूछे हैं, लेकिन इससे ज्यादा क्या करें, उन्होंने खुद नहीं पता।
एनजीओ की मदद के लिए लगाई गुहार
शिक्षा विभाग की योजना या विकास के लिए वे क्या कर रहे हैं। इस सवाल पर बस इतना ही कहा कि पैसे न होने के कारण वे अपनी साइंस लैब और शिक्षक की नई भर्ती अभी नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन इसके बाद वे बस एनजीओ की मदद की गुहार ही लगते नजर आए। उन्होंने कहा कि एनजीओ को शाम के साथ अपने सेक्टर या गांव, कालोनी में ओपन स्कूल कम्यूनिटी सेंटर खुलना चाहिए और बच्चों को शिक्षित करना चाहिए।