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केंद्रीय विवि पर शासन की दोहरी नीति की मार
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 02 Oct 2013 11:47 PM IST
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केंद्रीय विश्वविद्यालय की नियमावली पर सरकार का रुख साफ न होने से कॉलेजों में असमंजस की स्थिति है। कॉलेज गढ़वाल विश्वविद्यालय से असंबद्ध होने की मांग करते हैं तो राज्य सरकार केंद्र का मामला बता देती है।
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हालांकि, इसी शासन के आदेश पर आयुर्वेदिक कॉलेजों को उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से संबद्ध किया गया है।
केंद्र का मामला
केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय से संबद्ध एसजीआरआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज ने आठ अगस्त को प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा राधा रतूड़ी को पत्र भेजकर श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय से संबद्धता की मांग की थी।
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19 अगस्त को प्रमुख सचिव ने पत्र भेजकर इसे केंद्र का मामला बता दिया। उनका तर्क है कि केंद्रीय गढ़वाल विवि केंद्र के अधीन है। वहीं, राजकीय महाविद्यालयों को श्रीदेव सुमन विवि से संबद्धता करने का मामला भी ठंडे बस्ते में है।
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आयुर्वेद विवि से कराने का शासनादेश जारी
दूसरी ओर, केंद्रीय विवि का हवाला देने वाले शासन ने चार आयुर्वेदिक कालेजों की संबद्धता उत्तराखंड आयुर्वेद विवि से कराने का शासनादेश जारी किया था। इसके तहत दो सरकारी और दो निजी कॉलेज गढ़वाल विवि से असंबद्ध होकर आयुर्वेद विवि से संबद्ध हो चुके हैं।
गढ़वाल विवि से संबद्ध करीब 180 कालेजों में शासन की दोहरी नीति की वजह से असमंजस में है। इस मामले में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा राधा रतूड़ी ने जानकारी देने से इंकार कर दिया।
एफिलिएशन की प्रक्रिया
संबद्ध कॉलेज को असंबद्ध होने और दूसरे विश्वविद्यालय से संबद्धता के लिए शासन को पत्र भेजना होता है। एक आवेदन उस विवि को भेजना होता है, जिससे असंबद्ध होना है। विवि आवेदन के साथ ही कालेज को असंबद्ध कर देता है।
शासन की ओर से एक जीओ जारी किया जाता है कि संबंधित असंबद्ध होने वाले कॉलेज को नए विवि से संबद्ध किया जाए। चूंकि कॉलेज, जिस विवि से संबद्ध होगा, वह राज्य सरकार के अधीन है। इसलिए शासन की ओर से सहमति मिले बिना नए विवि में संबद्धता संभव नहीं है।
एक्ट में प्रावधान नहीं
अहम बात यह है कि 15 जनवरी 2009 को जब गढ़वाल विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय बना तो उसकी नियमावली में लिखा गया कि 14 जनवरी 2009 तक जो कॉलेज जिस प्रकार से है, उसी तरह रहेगा। केंद्रीय विवि की नियमावली में कहीं भी संबद्ध या असंबद्ध शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यानी न तो कालेज संबद्ध किया जा सकता है न ही असंबद्ध। इसी वजह से नियमावली के संबंध में असमंजस बढ़ जाता है।