नई डिग्रियों को UGC की ना, अब केवल 129 कोर्स मान्य
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश की किसी भी यूनिवर्सिटी या महाविद्यालय में अब फैंसी और मनगढ़ंत कोर्स नहीं चलेंगे।
यूजीसी की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने 129 शैक्षिक डिग्रियों के नाम तय कर दिए हैं। इनसे इतर जितनी भी डिग्रियां चल रही हैं, वह तत्काल बंद कर दी जाएंगी।
यही नहीं, नई डिग्रियां शुरू करने के लिए सरकार, प्राइवेट या डीम्ड यूनिवर्सिटी के लिए यूजीसी को ठोस वजह बतानी होगी। इस बाबत केंद्र सरकार ने जुलाई में गजट नोटिफिकेशन जारी कर दी है।
नहीं मानने पर होगी कार्रवाई
सरकार ने कई कोर्स में प्रवेश की अर्हता बदल दी है। अब किसी भी विवि में 129 के अलावा नई डिग्री नहीं शुरू होगी, जब तक उसके सशक्त और तर्कपूर्ण कारण न हो।
उल्लंघन पर यूजीसी मामले की जांच करेगी। फिर वेबसाइट पर ऐसे कॉलेज और यूनिवर्सिटीज की लिस्ट, उनके अमान्य कोर्सेज के साथ डाल देगी।
एलएलबी के लिए सिर्फ स्नातक जरूरी
नोटिफि केशन के मुताबिक अब किसी भी स्ट्रीम का स्नातक तीन वर्षीय एलएलबी कर सकता है।
एलएलएम अब दोबारा दो साल का होगा। दाखिले के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन जरूरी होगी। सरकार ने वर्ष 2013 में एलएलएम की अवधि एक साल कर दी थी।
इंटिग्रेटेड कोर्स का फायदा खत्म
सरकार ने इंटिग्रेटेड कोर्स में मिलने वाली छूट खत्म कर दी है। अब तक किसी भी विषय में इंटिग्रेटेड कोर्स करने वाले छात्रों को एक साल का लाभ मिलता था।
मसलन किसी को बीए-एलएलबी करनी है तो उसे बीए के तीन और एलएलबी तीन साल के बजाय यह डिग्री पांच साल में मिल जाती थी। अब छात्र को पूरे छह साल खर्च करने होंगे।
इसका असर देश के 15 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज पर पड़ेगा। वहां एक साल का एलएलएम और पांच साल के इंटिग्रेटेड एलएलबी कोर्स चल रहे हैं।
इंजीनियरिंग भी अछूता नहीं
इन दिनों इंजीनियरिंग में सबसे ज्यादा फैंसी कोर्स चल रहे हैं। मगर सरकार ने साफ किया है इंजीनियरिंग में अब बीटेक, बीई, एमटेक, एमई, बी आर्क, एमआर्क, बी प्लान, एम प्लान, बीआईडी, एमआईडी, बी डिजाइन और एम डिजाइन कोर्स ही चलेंगे।
यह हैं 12 महत्वपूर्ण बदलाव
1. बैचलर ऑफ जर्नलिज्म कोर्स अब एक साल का होगा। इसके लिए प्रवेश अर्हता स्नातक होगी।
2. मास्टर ऑफ जर्नलिज्म कोर्स भी एक साल का होगा। अर्हता किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएशन की जगह सिर्फ बीजे कर दी गई है।
3. बी.लिब/बी.लिब-आई साइंस कोर्स अब एक साल का। अर्हता ग्रेजुएशन होगी।
4. एम.लिब दो के बजाय एक साल का होगा। प्रवेश अर्हता बी.लिब होगी।
5. एम.लिब आई साइंस भी एक साल का। अर्हता बी.लिब आई साइंस होगी।
6. बीसीएल को एलएलबी सिविल लॉ या कॉमर्शियल लॉ माना जाएगा।
7. बीजीएल को एलएलबी जनरल लॉ, बीएल को एलएलबी, एमएल को एलएलएम और डीएल को एलएलडी के रूप में माना जाएगा।
8. बीबीएस/बीबीएम/बीबीई को बीबीए या बीकॉम या बीकॉम ऑनर्स माना जाएगा।
9. बीआईबीएफ को बीबीए या बीकॉम इंटनेशनल बिजनेस, एमएफएम/एमएफसी को एमबीए फाइनेंशियल मैनेजमेंट माना जाएगा।
10. होटल मैनेजमेंट का बीएचटीएम अब बीएचएम या बीएचएमसीटी होगा। 11. बीटीए को बीबीए टूरिज्म एंड ट्रेवल और एमटीए को एमबीए टूरिज्म एंड ट्रेवल माना जाएगा।
12. मेडिकल में बीएएम को बीएएमएस, बी नेट आयुर्वेद को बीएनवाईएस, बी नेट यौगिक को बीएनवाईएस, एमएएमएस को एमडी आयुर्वेद, एमएचएमएस को एमडी होम्यो, एमयूएमएस को एमडी यूनानी, एमएस फार्म को एम फार्म, बीएस ट्रामा को बीएससी ट्रामा और एमएई को एमएससी एपिडिमाइलॉजी माना जाएगा।
सरकार ने लागू किए नियम
सरकार ने नियम लागू कर दिया है, लेकिन असमंजस यह है कि नए सत्र के लिए एक वर्षीय एलएलएम और पांच वर्षीय इंटिग्रेटेड एलएलबी में दाखिले और कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं।
- डॉ. राजेश बहुगुणा, प्राचार्य, लॉ कालेज, प्रेमनगर
गजट नोटिफिकेशन से उन यूनिवर्सिटीज को बदलाव करने होंगे, जहां अनोखे इंजीनियरिंग, लॉ, मैनेजमेंट कोर्स चल रहे हैं। तय फॉर्मेट से अलग नाम नहीं रख सकते, अच्छी पहल है।
- डॉ. आशीष उनियाल, उपकुलसचिव, यूटीयू