फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   CBSE will go to online syllabus, till class 8th

गजब: अब बैग लेकर स्कूल नहीं जाएंगे बच्चे!

Sun, 04 May 2014 06:23 PM IST
Updated Sun, 04 May 2014 06:23 PM IST
विज्ञापन
CBSE will go to online syllabus, till class 8th

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बच्चों के कंधे से बस्ते का बोझ खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। जिसके तहत एक से आठवीं कक्षा का पूरा सिलेबस ऑनलाइन करने की बात कही जा रही है।

विज्ञापन


हालांकि इस नई व्यवस्था को शैक्षिक सत्र 2015-16 में लागू करने की बात सीबीएसई अधिकारियों कह रहे है। जिसकी जानकारी से हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस के पदाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
विज्ञापन


साथ ही इस पूरे मामले पर एसोसिएशन के पदाधिकारियों से लेकर स्कूल प्रधानाचार्यो का क्या मत है, इसे लेना शुरू कर दिया गया है। जिस पर अंतिम फैसला इस वर्ष के अंत तक लिए जाने की बात बताई गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

...तो खत्म हो जाएगा कंधे का दर्द

CBSE will go to online syllabus, till class 8th

हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस के प्रदेश अध्यक्ष एसएस गोसाई ने बताया कि नई व्यवस्था को लागू करने के पीछे सीबीएसई अधिकारियों का तर्क है कि मौजूदा समय में सीबीएसई स्कूल में पढ़ने वाला शायद ही कोई ऐसा बच्चा हो।

जिसके पास घर में कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मॉर्ट फोन जैसी सुविधाए न हो, प्रत्येक  बच्चा संचार युग में घर पर ही नहीं अपने मोबाइल फोन के जरिए इंटरनेट सेवा से जुड़ा है।

ऐसे में एक से आठवीं कक्षा का पूरा सिलेबस अगर ऑन लाइन कर दिया जाए तो कक्षाओं में आने के लिए बच्चों को भारी भरकम बस्ते में किताब लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बच्चा पढ़ाई के लिए अपना स्टडी मैटेरियल डाउनलोड कर लेगा। जिससे उसे पढ़ने में भी आसानी होगी।

बस वही नहीं, ये फायदे भी हैं

CBSE will go to online syllabus, till class 8th

मौजूदा समय में सीबीएसई स्कूलों में एक से पांचवीं कक्षा की किताबें 2500 रुपये और छटी से आठवीं कक्षा की किताबों की कीमत 3000 रुपये है। जिन्हें खरीदने के लिए अभिभावकों को राशि खर्च करनी पड़ती है।

लेकिन इस व्यवस्था से अभिभावकों को प्रति वर्ष इस खर्च से निजात मिल जाएगी। साथ ही इन कक्षाओं की किताब पर खर्च होने वाला कागज की भी बचत होगी। जिससे पर्यावरण संरक्षण भी आसानी से हो सकेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed