नेट देने नहीं जाना पड़ेगा शिमला-चंडीगढ़
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प्रदेश के हजारों युवाओं को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के फैसले से राहत मिली है। यूजीसी ने केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में यूजीसी नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्र स्थापित कर कुलपति को बतौर परीक्षक भी जिम्मेवारी सौंपी है। यूजीसी के इस फैसले से चंबा, कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना, मंडी और आसपास क्षेत्रों के युवाओं को बाहरी राज्यों में यूजीसी नेट देने नहीं जाना पड़ेगा।
क्षेत्र के स्नातकोत्तर डिग्री धारक नेट के लिए शिमला सहित चंडीगढ़, अमृतसर, जालंधर का रुख करते थे। स्थानीय संस्थाओं की मांग पर यूजीसी ने मानव संसाधन मंत्रालय की सिफारिश पर यह फैसला लिया है। यूजीसी नेट के लिए वर्षभर में दो बार होने वाली परीक्षा के लिए हिमाचल में एकमात्र परीक्षा केंद्र होने से युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। परीक्षा देने के लिए जाने वाले युवाओं को परीक्षा से एक दिन पूर्व ही केंद्र में पहुंचना पड़ता था। इसके अलावा परीक्षा केंद्र दूर होने की वजह से कई बार अभ्यर्थी परीक्षा देने से भी वंचित रहते थे।
इन्होंने भेजा था मंत्रालय को मांगपत्र
सांसद शांता कुमार ने 6 अक्तूबर को मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र प्रेषित किया था, जबकि नगर परिषद धर्मशाला अध्यक्ष कमला पटियाल और पार्षदों, व्यापार मंडल धर्मशाला, स्थानीय निवासी डा. अंजन के कालिया सहित अन्य लोगों ने संयुक्त रूप से धर्मशाला में यूजीसी नेट का परीक्षा केंद्र स्थापित करने की मांग की थी।
यूजीसी ने केंद्रीय विश्वविद्यालय को नेट के संचालन का जिम्मा सौंपा है। यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में परीक्षा संचालित की जाएगी।
- प्रो. योगेंद्र वर्मा, कुलपति केंद्रीय विवि धर्मशाला