फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   cbse students have to focus on practical

अब सिर्फ किताबी ज्ञान से नहीं चलेगा काम

Mon, 07 Oct 2013 01:11 AM IST
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ Updated Mon, 07 Oct 2013 01:11 AM IST
विज्ञापन
cbse students have to focus on practical
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) स्कूलों की कक्षा 9 व 11 में पढ़ने वाले छात्रों के लिए पढ़ाई थोड़ी मुश्किल होने जा रही है।
विज्ञापन


छात्रों का काम सिर्फ किताबी ज्ञान से नहीं चलेगा। उन्हें किताबों में पढ़ी जाने वाली थ्योरी को समसामयिक घटनाओं पर लागू करना भी सीखना होगा।

इसके आधार पर वार्षिक परीक्षा में 10 नंबर मिलेंगे। सीबीएसई ने ओपन बुक एग्जाम का प्रारूप व सिलेबस जारी कर दिया है। इस साल कक्षा 9 व 11 के समेटिव असिसमेंट-टू एग्जाम से लागू किया जाना है।

कक्षा 9 में सभी विषयों और 11 में इकोनॉमिक्स, बायोलॉजी और जियोग्राफी विषय में इसे लागू किया जाएगा। वार्षिक मूल्यांकन में 90 नंबर लिखित परीक्षा और दस नंबर ओपन बुक एग्जाम के आधार पर दिए जाएंगे।
विज्ञापन


इंग्लिश का पेपर 70 नंबर का होगा। उसमें 20 नंबर का स्पीकिंग और लिसनिंग असेसमेंट और 10 नंबर ओपन बुक एग्जाम के शामिल होंगे।

स्कूली बच्चों को किताबी दुनिया से बाहर निकालने और आसपास के माहौल से जोड़ने के उद्देश्य से ही ओपन बुक एग्जाम को प्रैक्टिल बनाने की कोशिश की गई है।

इसमें पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, भारत की विविधता जैसे विषयों को शामिल किया गया है जिससे छात्र अपनी व्यवहारिक समझ का इस्तेमाल कर सकें और गंभीर मसलों पर अपनी राय बना सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


तीन से चार सवाल होंगे शामिल
ओपन बुक एग्जाम के पेपर में अधिकतम तीन से चार सवाल होंगे। ये विद्यालय स्तर पर ही तैयार किए जाएंगे। छात्रों को परीक्षा से कुछ महीनों पहले ही स्टडी मैटीरियल उपलब्ध करा दिया जाएगा। वह उसे परीक्षा हॉल के अंदर लेकर जा सकेंगे। सीबीएसई के सिटी कोऑर्डिनेटर जावेद आलम खान ने बताया कि इससे बच्चों में थ्योरी के व्यवहारिक ज्ञान को परखने का मौका मिलेगा। ओपन टेस्ट असेसमेंट में पूछे जाने वाले सवाल उच्च स्तरीय चिंतन दक्षता पर आधारित होंगे। इनका प्रारूप वैकल्पिक, वस्तुपरक और रचनात्मक भी हो सकता है।


समन्वयक की भूमिका में होंगे शिक्षक

शिक्षकों को छात्रों के लिए थ्योरी और व्यवहार आधारित शिक्षण के बीच समन्वय स्थापित करना होगा। उन्हें टेक्स्ट या केस स्टडी ऐसे विकसित करनी होगी कि वे छात्रों को प्रोत्साहित करें। उनके अंदर तर्क, विश्लेषण, प्रस्तुतीकरण और आलोचनात्मक दृष्टिकोण विकसित हो। राम प्रसाद बिस्मिल मेमोरियल इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल राजेश कुमार ने बताया कि शिक्षकों को बताया गया कि वे सीबीएसई से मिला टेक्स्ट मैटेरियल छात्रों को ग्रुप में भी दे सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed