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इन्होंने खुद को तपाकर बच्चों को बनाया सोना

Wed, 21 May 2014 02:59 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 21 May 2014 02:59 PM IST
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बच्चा नाम रोशन करे, हर माता-पिता का यही सपना होता है। इस सपने को पूरा करने में वे न कभी अपनी कमजोर आर्थिक हालत की फिक्र करते हैं और न बच्चे को कोई कमी होने देते हैं।

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बेशक वे पढ़े लिखे भी न हों, लेकिन खुद को तपाकर वे बच्चे को सोने की तरह चमकने लायक जरूर बनाते हैं।

सीबीएसई दसवीं के रिजल्ट में कई ऐसे होनहार सामने आए हैं, जिनके माता-पिता ने मुफलिसी की जिंदगी जीते हुए बच्चे के सुनहरे भविष्य की मजबूत नींव रख दी है।

बच्चों ने भी माता-पिता के अरमानों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। बिना ट्यूशन इन बच्चों ने बेहतरीन ग्रेड पाकर अभिभावकों का सिर गर्व से ऊंचा किया है।

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आर्मी ऑफिसर बनना चाहता है दिलीप

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उम्मेदपुर निवासी गुरु प्रसाद के लिए मंगलवार का दिन खास रहा। खुद अशिक्षित गुरु ने बेटे दिलीप वर्मा को जिंप पायनियर स्कूल में दाखिला दिलाया।

उन्हें उम्मीद थी कि बेटा अच्छे स्कूल में जाएगा तो बेहतर शिक्षा हासिल करेगा। दिलीप ने भी 8.6 सीजीपीए के साथ उनकी आस पूरी की है।

दिलीप ने बताया कि स्कूल टूर में एक बार आईएमए जाने का मौका मिला था, तबसे वह आर्मी ऑफिसर बनना चाहता है।

गुरु प्रसाद ने बताया कि वह सालभर खुद के लिए कपड़े नहीं बना पाते, लेकिन बच्चे की स्कूल यूनिफार्म और फीस में कभी कोई कमी नहीं करते।

रोजगार के नाम पर गुरु के पास चार भैंस हैं, जिनका दूध बेचकर गुजारा चलता है। चार बच्चों में दूसरे दिलीप के रिजल्ट में ग्रेडिंग आदि वह नहीं समझते, लेकिन यह मालूम है कि बेटा अच्छे नंबर से पास हुआ है।

गुरु कहते हैं कि अशिक्षित होने के कारण उन्होंने जो मुफलिसी देखी है, नहीं चाहते कि बच्चे भी वह झेलें।

अंकित का सपना डॉक्टर बनना

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पिता मुरलीधर चमोली द्वारिका स्टोर के पास एक छोटी से सब्जी की दुकान चलाते हैं।

तीन बच्चों में सबसे छोटे अंकित ने आज 10 सीजीपीए प्राप्त कर उनका सीना चौड़ा कर दिया है। मां रूपा का कहना है कि वह खुद अनपढ़ थे, लेकिन तीनों बच्चों को पढ़ाने में पूरी जिंदगी लगा दी।

सब्जी बेचकर जो मेहनत की उसका नतीजा तीनों बच्चों ने भी बेहतर शैक्षिक परिणामों से माता-पिता को दिया।

चमोली की बड़ी बेटी कंप्यूटर टीचर है तो छोटी डीएवी कालेज से पीएचडी कर रही है।

बताया कि मुफलिसी के बावजूद उन्होंने बेटे को दून इंटरनेशनल स्कूल में दाखिला दिलाया। अंकित ने भी जमकर पढ़ाई की, जिसका नतीजा मंगलवार के परिणाम के रूप में आया। अब अंकित का सपना डॉक्टर बनने का है।

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