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विवादों में सीबीएसई की मेरिट, छात्रों में नाराजगी

Fri, 30 May 2014 04:56 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 30 May 2014 04:56 AM IST
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सीबीएसई देहरादून रीजन का पहला ही रिजल्ट खासा विवादों में रहा। एक ओर मार्किंग को लेकर अभिभावक व छात्र नाराज थे तो दूसरी ओर बोर्ड के पांच व छह विषयों के फंडे पर सभी उलझन में आ गए। पहली बार ऐसा हुआ है जब बोर्ड ने टॉपर्स को दो श्रेणियों में बांटकर पेश किया।

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सीबीएसई बोर्ड के देहरादून रीजन ने इस साल 12वीं के परिणाम को दो श्रेणियों में बांटकर प्रस्तुत किया। इसमें शीर्ष पांच विषयों के आधार पर रीजन के टॉपर अलग थे तो छह विषयों के आधार पर टॉपर अलग।
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कई स्कूलों को तो यह बात हजम ही नहीं हुई। हर साल टॉपर देने वाले स्कूल भी इस प्रक्रिया से खासे नाराज दिखे।

बाद में बदला गया नियम

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जानकारी के मुताबिक सीबीएसई के एग्जामिनेशन बायलॉज के अनुसार केवल शुरू के पांच विषयों के आधार पर ही परसेंटेज दी जानी चाहिए थी। लेकिन क्षेत्रीय कार्यालय का यह फंडा अजब अनोखा ही रहा।

ज्यादातर स्कूल संचालकों का भी यही कहना था कि इस वजह से बेहद उलझन पैदा हो गई है।

वहीं क्षेत्रीय निदेशक मनोज श्रीवास्तव का कहना था कि कहीं भी यह नियम नहीं है कि हम किस आधार पर इवेल्यूएशन कर रहे हैं। हमारा काम केवल बच्चे को 12वीं पास का सर्टिफिकेट देना है।

सीबीएसई के दफ्तर में हंगामा

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सीबीएसई देहरादून रीजन के पहले रिजल्ट की खामियों से अभिभावक और छात्र बेहद परेशान रहे। हालात यह थे कि जिन छात्रों ने प्री बोर्ड में गणित में शानदार अंक पाए थे, बोर्ड परीक्षा में वह एक अंक पर सिमट गए।

रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों व अभिभावकों ने राजेंद्र नगर स्थित बोर्ड कार्यालय पर प्रदर्शन किया।

छात्र आनंद बिष्ट ने गणित में 12, साक्षी चौहान के 3, आयुष वर्मा के 1, तरुण शर्मा के गणित में एक और फिजिक्स में 11, अमाल्या के गणित में एक अंक आया है। उनका कहना था कि बोर्ड की गलती की वजह से वह फेल हो गए हैं।

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अभिभावकों ने बताईं रिजल्ट में कमियां

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बोर्ड से अपनी उत्तर पुस्तिकाएं मांगी लेकिन कोई आश्वासन नहीं मिला। एक अभिभावक सुशील कश्यप ने बताया कि जब उन्होंने अपने बेटे अपार का रोल नंबर वेबसाइट पर डाला तो किसी लड़की के नाम से मार्कशीट खुलकर आई।

बरेली के एक अभिभावक ने फोन पर बताया कि उनके बच्चे के प्रैक्टिकल के मार्क्स ही रिजल्ट में नहीं जोड़े गए हैं।

मामले पर क्षेत्रीय निदेशक मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया बेहद मजबूत है। फिर भी अगर किसी छात्र को आपत्ति है तो वह नियमानुसार अपनी आंसर शीट निकलवा सकता है।

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