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सीबीएसई ने स्कूलों पर कसी नकेल
सचिन त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Tue, 22 Oct 2013 01:23 AM IST
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सीबीएसई ने स्टूडेंट्स को अपने मन से ज्यादा से ज्यादा नंबर देने वाले स्कूलों पर लगाम कसने की तैयारी कर ली है। 9वीं और 10वीं में (सीसीई) के आधार पर दिए गए नंबरों का सत्यापन बोर्ड स्वयं करेगा।
स्कूलों को उनके यहां के मूल्यांकन का पूरा ब्योरा सिटी कोऑर्डिनेटर या क्षेत्रीय निदेशकों के यहां सत्यापन के लिए भेजना होगा। स्कूलों को यह ब्यौरा 15 नवंबर तक भेजना होगा।
सिटी कोआर्डिनेटर सीसीई का मूल्यांकन करने के बाद अपनी रिपोर्ट बोर्ड को भेजेंगे। अगर नंबर देने में कोई गड़बड़ी की गई होगी तो बोर्ड उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा।
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स्टूडेंट्स पर अनावश्यक दबाव न पड़े इसलिए सीबीएसई ने नौवीं और 10वीं में बोर्ड परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। कड़ी प्रतिस्पर्धा के दबाव से बच्चों को बचाने के लिए अब दसवीं में स्टूडेंट्स को नंबर के बजाय ग्रेड प्वाइंट दिए जाते हैं।
बोर्ड परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त होने के बाद कॉलेज आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर स्टूडेंट्स को नंबर देते हैं। होम एग्जाम होने के कारण कई कॉलेजों पर स्टूडेंट्स को ज्यादा नंबर देने के आरोप भी लगते है।
बोर्ड ने इस फर्जीवाड़े को रोकने की तैयारी कर ली है। इसके लिए सीबीएसई ने स्कूलों द्वारा किए गए असेसमेंट का सत्यापन करने का फैसला किया है।
अब शहर के सभी स्कूलों को उनके द्वारा नौवीं और 10वीं में स्टूडेंट्स का एसेसमेंट करने में प्रयोग की गई सामग्री का सत्यापन कराना होगा।
एसेसमेंट सामग्री से पता चल जाएगा कि वास्तव में स्टूडेंट्स को जितने नंबर दिए गए हैं वह उसके लायक था यह नहीं। अगर स्कूल ने एसेसमेंट की गलत प्रक्रिया अपनाई है तो उसका पता भी सत्यापन में लग जाएगा।
इसके बाद बोर्ड ऐसे स्कूलों को एसेसमेंट का सही तरीका बताएगा।
लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई
सीबीएसई की एकेडमिक, रिसर्च, ट्रेनिंग एंड इनोवेशन निदेशक डॉ. साधना पराशर के मुताबिक जो स्कूल एसेसमेंट संबंधी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड ऐसे स्कूलों से सीधे संपर्क करेगा।
यह भेजना होगा स्कूलों को
स्कूलों को फॉर्मेटिव असेसमेंट के अंतर्गत सत्र 2013-14 में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की एसेसमेंट सामग्री भेजनी है।
इन विषयों में स्कूलों को स्टूडेंट्स द्वारा किए असाइनमेंट भी भेजने होंगे। सेमिनार और ग्रुप असाइनमेंट के मामले में स्कूलों को छोटा से लेख के साथ ही इवेंट फोटोग्राफ भी भेजने होंगे।
स्कूलों को केवल वही सामग्री भेजनी है जिसका उपयोग स्कूलों ने स्टूडेंट्स को ग्रेड देने में प्रयोग किया हो। सारे मैटेरियल के साथ ही स्कूलों को नंबर देने के पैरामीटर भी बताने होंगे।
ऐसे होगा सत्यापन
सीबीएसई ने सत्यापन की प्रक्रिया भी तय कर दी है। सत्यापन प्रक्रिया में स्कूल के सभी बच्चों को उन्हें मिले अंकों के आधार पर सबसे ज्यादा से कम की ओर के क्रम से लगाया जाएगा।
इसके बाद स्टूडेंट्स की संख्या को तीन भागों में बांटा जाएगा। मसलन अगर किसी स्कूल में नौवीं और 10वीं में 100 बच्चे हैं, तो इन्हें 33, 33 और 34 के तीन ग्रुप में बांटा जाएगा।
इसके बाद हर ग्रुप से पांच-पांच बच्चे छांटे जाएंगे। इन 15 बच्चों को मिले अंकों का असेसमेंट सामग्री से मिलान करके सत्यापन किया जाएगा। इन्हीं 15 बच्चों के आधार पर स्कूलों की असेसमेंट रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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स्कूलों को उनके यहां के मूल्यांकन का पूरा ब्योरा सिटी कोऑर्डिनेटर या क्षेत्रीय निदेशकों के यहां सत्यापन के लिए भेजना होगा। स्कूलों को यह ब्यौरा 15 नवंबर तक भेजना होगा।
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सिटी कोआर्डिनेटर सीसीई का मूल्यांकन करने के बाद अपनी रिपोर्ट बोर्ड को भेजेंगे। अगर नंबर देने में कोई गड़बड़ी की गई होगी तो बोर्ड उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा।
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स्टूडेंट्स पर अनावश्यक दबाव न पड़े इसलिए सीबीएसई ने नौवीं और 10वीं में बोर्ड परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। कड़ी प्रतिस्पर्धा के दबाव से बच्चों को बचाने के लिए अब दसवीं में स्टूडेंट्स को नंबर के बजाय ग्रेड प्वाइंट दिए जाते हैं।
बोर्ड परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त होने के बाद कॉलेज आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर स्टूडेंट्स को नंबर देते हैं। होम एग्जाम होने के कारण कई कॉलेजों पर स्टूडेंट्स को ज्यादा नंबर देने के आरोप भी लगते है।
बोर्ड ने इस फर्जीवाड़े को रोकने की तैयारी कर ली है। इसके लिए सीबीएसई ने स्कूलों द्वारा किए गए असेसमेंट का सत्यापन करने का फैसला किया है।
अब शहर के सभी स्कूलों को उनके द्वारा नौवीं और 10वीं में स्टूडेंट्स का एसेसमेंट करने में प्रयोग की गई सामग्री का सत्यापन कराना होगा।
एसेसमेंट सामग्री से पता चल जाएगा कि वास्तव में स्टूडेंट्स को जितने नंबर दिए गए हैं वह उसके लायक था यह नहीं। अगर स्कूल ने एसेसमेंट की गलत प्रक्रिया अपनाई है तो उसका पता भी सत्यापन में लग जाएगा।
इसके बाद बोर्ड ऐसे स्कूलों को एसेसमेंट का सही तरीका बताएगा।
लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई
सीबीएसई की एकेडमिक, रिसर्च, ट्रेनिंग एंड इनोवेशन निदेशक डॉ. साधना पराशर के मुताबिक जो स्कूल एसेसमेंट संबंधी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड ऐसे स्कूलों से सीधे संपर्क करेगा।
यह भेजना होगा स्कूलों को
स्कूलों को फॉर्मेटिव असेसमेंट के अंतर्गत सत्र 2013-14 में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की एसेसमेंट सामग्री भेजनी है।
इन विषयों में स्कूलों को स्टूडेंट्स द्वारा किए असाइनमेंट भी भेजने होंगे। सेमिनार और ग्रुप असाइनमेंट के मामले में स्कूलों को छोटा से लेख के साथ ही इवेंट फोटोग्राफ भी भेजने होंगे।
स्कूलों को केवल वही सामग्री भेजनी है जिसका उपयोग स्कूलों ने स्टूडेंट्स को ग्रेड देने में प्रयोग किया हो। सारे मैटेरियल के साथ ही स्कूलों को नंबर देने के पैरामीटर भी बताने होंगे।
ऐसे होगा सत्यापन
सीबीएसई ने सत्यापन की प्रक्रिया भी तय कर दी है। सत्यापन प्रक्रिया में स्कूल के सभी बच्चों को उन्हें मिले अंकों के आधार पर सबसे ज्यादा से कम की ओर के क्रम से लगाया जाएगा।
इसके बाद स्टूडेंट्स की संख्या को तीन भागों में बांटा जाएगा। मसलन अगर किसी स्कूल में नौवीं और 10वीं में 100 बच्चे हैं, तो इन्हें 33, 33 और 34 के तीन ग्रुप में बांटा जाएगा।
इसके बाद हर ग्रुप से पांच-पांच बच्चे छांटे जाएंगे। इन 15 बच्चों को मिले अंकों का असेसमेंट सामग्री से मिलान करके सत्यापन किया जाएगा। इन्हीं 15 बच्चों के आधार पर स्कूलों की असेसमेंट रिपोर्ट तैयार की जाएगी।