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अब दीजिए परीक्षाएं किताबें खोलकर

Fri, 28 Feb 2014 05:08 PM IST
अमर उजाला, फरीदाबाद
अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Fri, 28 Feb 2014 05:08 PM IST
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CBSE: 9th and 11th students can give exam open book

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने एक ऐसी अनोखी व्यवस्था की है, जिसके तहत नौवीं व 11वीं की वार्षिक परीक्षा में बैठने वाले छात्र अपने पास संबंधित विषय की किताब रख सकेंगे।

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फिलहाल यह व्यवस्था तीन विषयों के लिए लागू की गई है, जिसमें दो-दो प्रश्न ही आएंगे। बोर्ड अधिकारियों ने इस व्यवस्था को मौजूदा शैक्षिक सत्र में ही लागू करने का फैसला ले लिया है। स्कूलों के प्रधानाचार्यों के मुताबिक, सीबीएसई ने 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं से पहले नौवीं व 11वीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा में बैठने वाले छात्रों के लिए बड़ा बदलाव किया है।
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बोर्ड ने दोनों कक्षाओं में ओपन टेक्स्ट बेस्ड असेसमेंट (ओटीबीए) के नाम पर 10-10 अंक का प्रश्न-पत्र करवाने का फैसला लिया है, जिसके अंक 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा में जोड़ने की बात कही गई है। ऐसे में 10वीं-12वीं की परीक्षाएं 90 अंकों की होगी।
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इसके तहत छात्र परीक्षा के समय अपने पास संबंधित विषय की किताब रख सकता है। प्रश्न का उत्तर समझ में न आने पर वह किताब खोलकर उत्तर तलाश कर लिख सकता है। यह प्रश्न पत्र बोर्ड की ओर से प्रत्येक स्कूल को परीक्षा से दस दिन पूर्व उपलब्ध करा दिया जाएगा।

इस व्यवस्था को नौवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान और 11वीं कक्षा के बायोलॉजी और इकोनॉमिक्स विषय के लिए चुना गया है, जिसमें पांच-पांच अंक के दो प्रश्न शामिल होंगे।

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यूपी में फेल हो चुकी है व्यवस्था
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 1993 से 1995 तक यूपी बोर्ड की परीक्षा में नकल व्यवस्था को लागू कराया था, जिसमें बोर्ड की परीक्षा देने वाले छात्र किताब रखकर प्रश्नों का उत्तर लिख सकते थे, लेकिन इस व्यवस्था के बाद भी परीक्षा परिणाम में सुधार नहीं किया जा सका। ऐसे में अगली सरकार में इस फैसले को वापस ले लिया था।


बच्चों को पढ़ाई से दूर करेगा फैसला
अभिभावक एकता मंच के जिला अध्यक्ष एनएल जांगिड़ का कहना है कि सीबीएसई के इस कदम को लेकर विरोध दर्ज कराया गया है, जिसमें कहा गया है कि एक ओर बोर्ड ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा वैकल्पिक कर दी है। इसके बाद अब यह किताब रखकर परीक्षा देने का फैसला बच्चों को पढ़ाई से दूर करेगा।

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