उत्तराखंड के आठ लाख बच्चों से छीन ली 'शिक्षा'
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स्कूलों में शिक्षक नहीं, भवन जर्जर हाल और अब उत्तराखंड के आठ लाख छात्रों को किताबों का भी इंतजार करना होगा।
पहले निविदा में देरी और अब फर्जीवाड़े की वजह से मार्च तक किताबों का प्रकाशन संभव नहीं है। ऐसे में सत्र 2015-16 की शुरुआत यानी एक अप्रैल तक सरकारी स्कूलों में बच्चों के हाथों में किताबें पहुंचना भी आसान नहीं होगा।
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पहले ही बदहाल है। 750 स्कूल भवन जर्जर हैं। कुछ स्कूलों में शिक्षक तो कुछ में बच्चों के लिए फर्नीचर तक नहीं है। 3289 स्कूलों में बिजली नहीं है, जबकि 1117 स्कूलों में बच्चे पेयजल को तरह रहे हैं। पहले ही इन सब दिक्कतों से जूझ रहे एक से आठवीं तक के आठ लाख छात्र अब किताबों के लिए तरसते रहेंगे।
फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद पता चला सच
विभागीय अधिकारियों की मानें तो मार्च में सभी जनपदों तक पुस्तकें पहुंच जानी चाहिए। लेकिन अब फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद ऐसा होना मुमकिन नहीं।
इससे नये शिक्षा सत्र में प्रदेश के 12477 प्राथमिक और 5266 जूनियर हाईस्कूलों के आठ लाख 44 हजार 39 बच्चों तक समय पर पाठ्य पुस्तकों पहुंचाना आसान नहीं होगा।
पुस्तकों की प्रिंटिंग में पहले ही देरी हुई है। इस देरी के लिए एससीईआरटी का जवाब तबल किया गया है। अब फर्जी बैंक गारंटी से इसमें कुछ और देरी होगी। इसके बावजूद प्रयास किया जाएगा कि बच्चों को समय पर पुस्तकें मिल सकें।
- डी सेंथिल पांडियन, शिक्षा महानिदेशक