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कोर्ट के फैसले के बाद अब गुरुजी लगाएंगे अंगूठा

Thu, 13 Nov 2014 02:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 13 Nov 2014 02:28 AM IST
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biometric attendance in uttarakhaknd.

उच्च न्यायालय हाईकोर्ट की ओर से सभी डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की बायोमीट्रिक से हाजिरी का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही अब कॉलेजों में इसकी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

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बायोमीट्रिक को लेकर लंबे समय से शिक्षकों का विरोध चलता आ रहा है लेकिन अब फैसले के बाद शिक्षकों ने इसका स्वागत करते हुए अंगूठा लगाने की प्रतिबद्धता जताई है।
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कॉलेजों में शिक्षकों की बायोमीट्रिक मशीन से हाजिरी संबंधी शासनादेश गत वर्ष आया था। तब डीएवी और डीबीएस कॉलेज में तो बायोमीट्रिक मशीनें भी लग गई थी लेकिन बाद में शिक्षकों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके बाद से जब भी शासन या उच्च शिक्षा निदेशालय से कोई आदेश आया तो वह मशीन चालू नहीं करवा पाया।
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हाईकोर्ट में याचिका के दौरान भी सितंबर में उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से बायोमीट्रिक का आदेश आया लेकिन शिक्षकों ने हड़ताल कर इसे रुकवा दिया था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद बायोमीट्रिक हाजिरी शुरू होगी। एसजीआरआर पीजी कालेज भी बायोमीट्रिक मशीनें खरीद चुका है। एमकेपी में अभी खरीदनी बाकी हैं।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बदल गए सुर

biometric attendance in uttarakhaknd.

हमने पहले ही कहा था कि हाईकोर्ट का जो आदेश आएगा, उसका सम्मान किया जाएगा। हम पूर्णरूप हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करेंगे। हमारा विरोध बायोमीट्रिक के बजाय यूजीसी नियमों पर था। हम जब कॉलेज जाएंगे तो जाहिर तौर पर बायोमीट्रिक से कोई परेशानी नहीं होगी।
-डॉ. डीके त्यागी, महामंत्री, गढ़वाल यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन।

हर दिन जाएगी रिपोर्ट
बायोमीट्रिक मशीन में सभी शिक्षकों की फिंगर प्रिंट सहेजी जाएगी। शिक्षक कॉलेज में कितने बजे एंट्री करते हैं और किस समय कॉलेज छोड़ते हैं, इसकी पूरी जानकारी कॉलेज के पास एक जगह एकत्र हो जाएगी। इसके बाद कॉलेज से हर दिन की हाजिरी रिपोर्ट शासन और उच्च शिक्षा निदेशालय भेजी जाएगी।

...तो इसलिए हो रहा था विरोध
दरअसल अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों का कहना था कि जब यूजीसी के मुताबिक 180 दिन और प्रतिदिन पांच घंटे उपस्थिति जैसे निर्देशों का पालन किया जा रहा है तो उन्हें कुछ सुविधाएं भी राजकीय कॉलेजों के शिक्षकों की तरह मिलनी चाहिए। इसमें शिक्षकों के लिए कालेजों में मूलभूत सुविधाएं मांगी गई थी।

यह होगा फायदा
अभी तक शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर कई तरह की अनियमितताएं सामने आती थी। कई शिक्षक बिना अनुमति लिए कई दिन छुट्टी काट आते थे और वापस लौटकर एप्लीकेशन देते थे। कई शिक्षक केवल हस्ताक्षर करने के बाद कॉलेजों से गायब हो जाते थे। अब बायोमीट्रिक मशीन आने के बाद कोई भी शिक्षक बिना कालेज में आए बाहर नहीं जा पाएगा।

इनका है कहना
नहित याचिका में शिक्षकों के ऊपर जो आरोप लगे थे, हम उसके विरोध में थे। जिस पर अभी तक फैसला नहीं आया है। रही बात बायोमीट्रिक की तो हस्ताक्षर तो हम करते ही हैं, यह निर्णय हमें मान्य है। आगे की रणनीति हाईकोर्ट का पूरा फैसला आने के बाद ही तय की जाएगी।
-डॉ. बीसी पांडे, अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ उत्तरांचल यूनिवर्सिटी कालेज टीचर्स एसोसिएशन

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