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उत्तराखंडः बीएड की 40 फीसदी सीटें रह गई खाली
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 27 Dec 2015 04:23 PM IST
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युवाओं का बीएड से मोहभंग होने लगा है। इस साल बीएड कॉलेजों में काउंसिलिंग खत्म होने के बाद भी 40 प्रतिशत से अधिक सीटें खाली रह गईं।
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ऐसे में बीएड कॉलेजों के सामने अस्तित्व बचाए रखने का संकट खड़ा हो गया है। सीटे न भर पाने के पीछे मुख्य वजह गढ़वाल विवि की ओर से देरी से काउंसिलिंग कराना और दो साल का बीएड हो जाना बताया जा रहा है। गढ़वाल विवि की बीएड प्रवेश परीक्षा में 14500 अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
विवि ने पहली बार प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को भी दाखिले का मौका दिया था। बावजूद इसके दो-तीन चरणों की काउंसिलिंग पूरी होने पर भी सीटें नहीं भर पाई। कुल 5500 बीएड सीटों में से 40 प्रतिशत सीटें खाली पड़ी हैं।
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दूसरी ओर, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। यहां बीएड की करीब दो हजार सीटों के लिए दो चरणों की काउंसिलिंग होने के बावजूद 50 प्रतिशत सीटें भी नहीं भर पाई। इस विवि से संबद्ध बीएड कॉलेजों पर भी अब अपना अस्तित्व बचाए रखने का संकट पैदा हो गया है।
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एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने की एक वजह तो बीएड की अवधि दो वर्ष होना है, लेकिन इसकी दूसरी बड़ी वजह से गढ़वाल विवि की लेटलतीफी भी रही।
विवि ने लंबे समय तक बीएड कॉलेजों का निरीक्षण करने के लिए दाखिलों की प्रक्रिया लटकाए रखी। इस वजह से जो छात्र यहां दाखिला लेना चाहते थे, वह दूसरे राज्यों को पलायन कर गए।