परीक्षा पैटर्न के साथ बीएड की पढ़ाई का तरीका भी बदला
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छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी ने बीएड के दो वर्षीय पाठ्यक्रम का नया कोर्स डिजाइन कर लिया है। कोर्स दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) की तरह है।
इसमें स्टूडेंट की ओवर आल पर्सनैलिटी विकसित करने पर ध्यान दिया गया है। प्रैक्टिकल, टीचिंग इंटर्नशिप पर फोकस है। पहली बार इंटरनल मार्किंग की व्यवस्था की गई है।
अब 20 फीसदी मार्क्स कॉलेज के शिक्षक ही देंगे। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) ने शैक्षिक सत्र 2015-16 से बीएड की पढ़ाई दो साल की कर दी है।
इसके तहत ही कानपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध 15 जिलों के 250 बीएड कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले करीब 35 हजार स्टूडेंट के लिए नया कोर्स डिजाइन किया गया है।
जुलाई से शुरू होगी पढ़ाई
नए कोर्स की पढ़ाई जुलाई 2015 से शुरू होगी। दोनों साल के पेपर 1300 मार्क्स के होंगे। डीन फैकल्टी ऑफ एजूकेशन प्रो. सुभाष अग्रवाल और डॉ. मुनेश कुमार की अगुवाई वाली शिक्षकों की टीम ने जो बीएड कोर्स तैयार किया है, अब उसे बोर्ड ऑफ स्टडीज के समक्ष रखा जाएगा।
बोर्ड ऑफ स्टडीज की मीटिंग इसी महीने होगी। मुहर लगते ही कोर्स करिकुलम जारी कर दिया जाएगा। इसका प्रारूप संबद्ध राजकीय, अनुदानित और निजी डिग्री कॉलेजों को भेजा जाएगा।
एजूकेशन डिपार्टमेंट के डॉ. मुनेश कुमार ने बताया कि क्लास से पहले प्रार्थना सभा कराई जाएगी। प्रार्थना से ही प्रैक्टिकल के लैंग्वेज प्रोफिसिएंसी को जोड़ दिया जाएगा।
इसकी मदद से एक-एक स्टूडेंट को 20 मिनट तक बोलने और उस पर 10 मिनट तक सवाल-जवाब करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ड्रेस कोड भी बनाया जा रहा है।
ऐसे मिलेंगे मार्क्स
अब 20 फीसदी मार्क्स संबंधित कॉलेज के शिक्षक दे सकेंगे। यह पहला मौका है, जब बीएड में इंटरनल मार्किंग की व्यवस्था की गई है।
80 फीसदी मार्क्स थ्योरी पेपर और प्रैक्टिकल से मिलेंगे। बीएड फर्स्ट ईयर और सेकेंड ईयर के प्रैक्टिकल 100-100 यानी 200 मार्क्स के होंगे। बीएड स्टूडेंट अब एक स्कूल में इंटर्नशिप नहीं ले सकेंगे। एक स्कूल में 10 स्टूडेंट को इंटर्नशिप करने की अनुमति दी जाएगी।
यदि किसी कॉलेज में 100 स्टूडेंट हैं तो उस कॉलेज संचालक को प्राइमरी और माध्यमिक स्तर के 10 स्कूलों से समझौता करना होगा। इन स्कूलों में 10-10 स्टूडेंट जाकर इंटर्नशिप करेंगे।
बीएड फर्स्ट ईयर और सेकेंड ईयर में तीन महीने की इंटर्नशिप अनिवार्य की गई है। अभी तक एक ही स्कूल से इंटर्नशिप करा दी जाती थी।