अब बीएड-एमएड की पढ़ाई होगी दो साल में
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अब देशभर में बीएड और एमएड की पढ़ाई एक नहीं, बल्कि दो साल की हो गई है और छात्रों को डिग्री पूरी करने के लिए तीन साल मिलेंगे। शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) ने शैक्षणिक सत्र 2015-16 के लिए देशभर के विश्वविद्यालयों समेत आईपी यूनिवर्सिटी को भी अधिसूचना भेजी है। विश्वविद्यालय अब अगले सत्र से नए पाठ्यक्रम और नए नियमों के साथ दाखिले करेगा। खास बात यह है कि अब बीएड और एमएड की पढ़ाई पूरी करने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय भी मिलेगा, लेकिन अगर हाजिरी 80 फीसदी से कम हुई तो छात्र परीक्षा में नहीं बैठ सकेंगे।
नियमों के साथ पाठ्यक्रम में भी बदलाव
देशभर में गिरती शिक्षा की गुणवत्ता को देखते हुए बीएड और एमएड के प्रोग्राम का टाइम पीरियड बढ़ाने के साथ-साथ पाठ्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। पहले वर्ष 850 नंबर के पेपर देने होंगे, जिसमें सालभर में 1120 घंटे की पढ़ाई अनिवार्य है। जबकि इंटरनल फॉर्मेटिव के 355 और एक्सटरनल समेटिव के 495 नंबर भी जुड़ेंगे। दूसरे वर्ष हफ्ते में 95 घंटे तो साल में 1120 घंटे क्लासरूम में पढ़ाई अनिवार्य हैं। दूसरे वर्ष 950 नंबर का पेपर आएगा। इसके अलावा इंटरनल फॉर्मेटिव के 530 और एक्सटरनल समेटिव के 420 नंबर भी जुड़ेंगे। इसके अलावा संस्कृत को अलग पेपर के रूप में भी शामिल कर लिया गया है।
खास बिंदूओं को विषयों के रूप में जोड़ा
-देश में महिलाओं के प्रति अपराध को देखते हुए अब शिक्षकों को बीएड प्रोग्राम में संवेदनशीलता का पाठ भी पढ़ाया जाएगा, ताकि स्कूल में छात्रों को महिला, बच्चों और अन्य मुद्दों पर संवेदनशील बना सकें।
बीएड में 50 -50 नंबर के पेपर जेंडर इन एजुकेशन और स्पेशल नीड्स इन क्लासरूम के होंगे।
पिछले दिनों कई स्कूलों में छात्रों के बीच हिंसा की वारदात सामने आई थी। इसे देखते हुए स्कूल में शांति विषय पर विशेष 50 नंबर का पेपर भी शामिल किया गया है।