इन बीएड कॉलेजों पर गिरने वाली है गाज
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बीएड के नए शैक्षणिक सत्र के लिए संबद्ध निजी बीएड कॉलेजों के निरीक्षण के लिए प्रदेश विश्वविद्यालय ने कमेटियों का गठन कर पूरा शेडयूल तैयार कर दिया है। ये कमेटियां 31 मई तक विवि से संबद्ध सभी निजी बीएड कॉलेजों का निरीक्षण पूरा करने की समयसीमा तय की है। कमेटियों में कुलपति के नॉमिनी के साथ एक सब्जेक्ट एक्सपर्ट के साथ ही एक स्थानीय डिग्री कॉलेज प्राचार्य सदस्य होगा।
कमेटी को इस बार हिदायत दी गई है कि बार-बार विवि के तय मानकों के मुताबिक सुविधाएं उपलब्ध न करवाने वाले निजी बीएड कॉलेजों की रिपोर्ट में इसे मार्क किया जाए। ऐसे बीएड कॉलेजों की वार्षिक संबद्धता पर खतरा पैदा हो सकता है। इस बार एनसीटीई की नई गाइडलाइन आने और बीएड कोर्स दो साल का किए जाने का फैसला आ जाने के बाद ऐसे कॉलेजों को शायद ही संबद्धता मिले। प्रदेश भर में एचपीयू से संबद्ध करीब 72 निजी बीएड कॉलेज चल रहे हैं।
इनमें नाममात्र ही ऐसे हैं, जिन्हें एचपीयू से स्थायी संबद्धता मिली हुई है। विवि ने एनसीटीई की अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद निजी बीएड कॉलेजों को संबद्धता के लिए किए जाने वाले निरीक्षण को तय फीस जमा करवाने का समय दिया था। विवि सिर्फ उन्हीं बीएड कॉलेजों का निरीक्षण करवाएगी, जिन्होंने आवेदन नहीं किया है, उन्हें विवि से संबद्धता नहीं मिल सकेगी।
चूंकि यह एनसीटीई के तहत एक आवश्यक प्रक्रिया है। विश्वविद्यालय इस अब तक वार्षिक संबद्धता देने के लिए विवि के तय मानकों के तहत बीएड कॉलेजों में स्टाफ, कंप्यूटर लैब, क्लास रूम के साथ ही अन्य हर शर्त का आकलन करता है।
कमेटियों का गठन कर पूरा शेड्यूल तैयार
एचपीयू के अधिष्ठता कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल प्रो. एसएस चौहान ने माना कि बीएड कॉलेजों के निरीक्षण के लिए कमेटियों का गठन कर पूरा शेड्यूल तैयार कर दिया गया है। 31 मई तक यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कमेटियां तय मानकों के मुताबिक सुविधाओं और अन्य शर्तों को पूरी करने वाले कॉलेजों को ही संबद्धता देगी। मानकों की अनदेखी करने वाले कॉलेजों पर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
बीएड डिग्री कोर्स के नए सत्र से एनसीटीई के फैसले के मुताबिक दो साल का किए जाने, कमेटियां शपथ पत्र के आधार पर ही तय यूनिट के आधार पर सुविधाओं का निरीक्षण करेंगी। हालांकि किस कॉलेज को कितने यूनिट और सीटें मिलेंगी, यह फैसला एनसीटीई ही लेगी। जिन कॉलेजों में पहले सौ सीट का यूनिट था, वहां दो यूनिट मान कर ही निरीक्षण करना होगा।