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हिसंक हो रहा दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव, कहीं बैन न हो जाए
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 10 Sep 2015 12:26 AM IST
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनावों में हिंसा का फैक्टर देखने को मिला है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन एक संगठन के उम्मीदवार पर हुए हिंसक हमले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कहीं यह हिंसक हमले डूसू चुनाव पर प्रतिबंध ना लगवा दें। हिसंक घटनाओं के मद्देनजर कुछ राज्यों में पहले ही छात्र संघ चुनाव पर रोक लग चुकी है। छात्र संगठन इन राज्यों में छात्र संघ चुनावों को शुरू कराने को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं।
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महाराष्ट्र में वर्ष 1992 से छात्र संघ चुनाव बैन है। दरअसल चुनाव के दौरान वहां एनएसयूआई केओवेन डिसूजा का मर्डर हुआ था। जिसके बाद से वहां चुनाव बैन कर दिए गए। इसी तरह हिंसक घटनाओं की आशंका से कई विवि चुनाव नहीं कराते।
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पिछले कुछ सालों को देखें तो डूसू चुनाव आमतौर पर शांतिपूर्ण तरीके से हो रहे थे कुछ झड़पें, मारपीट की घटनाएं तो हुई लेकिन किसी उम्मीदवार पर हमला करने जैसी हिसंक घटनाएं नहीं होती रहीं। राजनीतिक दिग्गज भी मान रहे हैं कि पिछले कुछ सालों में ऐसी घटनाएं नहीं हुई हैं।
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दरअसल हर साल एबीवीपी, एनएसयूआई में कड़ी टक्कर होती है, लेकिन बीते साल आइसा ने भी अपने वोट प्रतिशत को बढ़ाकर उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं इस बार पहली बार आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई सीवाईएसएस भी मैदान में है, जिससे चुनाव चतुष्कोणीय हो गया है।
जहां यह चुनाव एबीवीपी और एनएसयूआई के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। वहीं सीवाईएसएस खुद को यूथ से जुड़ा हुआ देखकर चारों सीटों पर जीतने का दावा कर रही है। इस लिहाज से यह चुनाव काफी अहम हो गए हैं। हर संगठन इन चुनावों में जीत चाहते हैं ताकि यह संदेश जाए कि यूथ किस संगठन के साथ है।