BBAU: शिक्षक के लिए तरस रहे एमफिल स्टूडेंट

ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 28 Jan 2014 11:41 AM IST
BBAU Sans teachers
एमफिल इन मॉस कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में तो स्टूडेंट्स ने दिलचस्पी दिखाई। लेकिन वीडियो फिल्म एंड प्रोडक्शन पाठ्यक्रम को स्टूडेंट्स ने नकार दिया।

इसके बावजूद विवि प्रशासन एमफिल के बजाय वीडियो फिल्म एंड प्रोडक्शन कोर्स के लिए शिक्षक की नियुक्ति कर रहा है।

यूजीसी के नियमों के अनुसार सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों के लिए अलग से शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए। सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रम की फीस के रूप में प्राप्त धनराशि का 75 प्रतिशत भाग शिक्षकों की सैलरी के मद में भुगतान किया जाना चाहिए।

बाकी 25 फीसदी धनराशि से अन्य खर्च निकाले जाएंगे। वीडियो फिल्म एंड प्रोडक्शन पाठ्यक्रम की फीस 10 हजार रुपये सालाना है। कोर्स में दो स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया पर परीक्षा फॉर्म नहीं भरा। इस तरह से पाठ्यक्रम से विश्वविद्यालय को महज 20 हजार रुपये की आय हुई।

दूसरी ओर 40 सीटों वाले एमफिल पाठ्यक्रम में 22 स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया। पाठ्यक्रम की फीस 40 हजार रुपये सालाना है। इस लिहाज से इस पाठ्यक्रम के स्टूडेंट्स से बीबीएयू को आठ लाख 80 हजार रुपये की आमदनी हुई।

विश्वविद्यालय ने बीते दिनों मॉस कम्युनिकेशन विभाग में मास्टर्स इन मॉस कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म पाठ्यक्रम की दो खाली पोस्ट के साथ ही पीजी डिप्लोमा वीडियो फिल्म एंड प्रोडक्शन पाठ्यक्रम के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर संविदा आधार पर एक शिक्षक की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है।

इंटरव्यू के लिए अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट भी कर लिया गया है। ऐसे में 40 हजार रुपये देन वाले एमफिल स्टूडेंट्स अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।

गेस्ट लेक्चर को एंट्री देने की तैयारी
विश्वविद्यालय ने संविदा पर शिक्षक की भर्ती के लिए बाकायदा विज्ञापन जारी किया है। पर विश्वविद्यालय के सूत्रों का कहना है कि बीबीएयू में अतिथि शिक्षक की परमानेंट एंट्री के लिए ऐसा किया जा रहा है। बीबीएयू का इतिहास बताता है कि एक बार संविदा पर एंट्री होने के बावजूद नियमित होने के अच्छे चांस रहते हैं।

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