गजब! परीक्षा के लिए घर से कॉपी ला रहे बच्चे
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राजधानी में सोमवार को कक्षा एक से आठ तक के बच्चों की शुरू हुई परीक्षाओं पर अव्यवस्थाएं भारी पड़ीं। आलम यह था कि बच्चे घर से कॉपियां लेकर आए थे।
नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय इरादतनगर में बेहद गंदे ब्लैक बोर्ड पर सवाल लिखा जा रहा था। सारे बच्चे जब उसका जवाब लिख लेते तो टीचर उस पर दूसरा सवाल लिख देते।
बीकेटी विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय भिखारीपुर में सोमवार को कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के लिए हिंदी का पेपर होना था।
शिक्षकों ने ब्लैकबोर्ड पर सवाल लिख दिए और बच्चों ने खुद की लाई हुई कापियों पर जवाब लिखने शुरू कर दिए।
कक्षा पांच के बच्चों को कॉपियां उपलब्ध कराई गई थीं। बाकी कक्षा के बच्चों को हाथ से लिखे हुए पेपर की फोटो कॉपी दी गई।
हैरत की बात तो तब हुई जब ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिखने के लिए स्कूल में चॉक तक नहीं थी। कई स्कूलों के बच्चों को पता ही नहीं नही था कि परीक्षा कब है।
परिषदीय स्कूलों की परीक्षा के दौरान महज खानापूर्ति ही नजर आई। 7:30 से एग्जाम शुरू होना था तो बच्चे 8:30 बजे तक आते रहे।
एक स्कूल में तो कमाल ही हो गया। प्राथमिक विद्यालय गऊघाट में 70 बच्चों के लिए एक ही कमरा है और यहीं पर ब्लैक बोर्ड है।
सोमवार को पहली परीक्षा के दिन कोई व्यवस्था नहीं की गई। आठ बजते-बजते बच्चे स्कूल पहुंचे।
अब संकट था कि एक साथ पांच कक्षाओं के सवाल ब्लैक बोर्ड पर कैसे लिखे जाएं फिर तय हुआ कि सबसे पहले पांचवी के प्रश्न लिखे जाएंगे फिर अन्य कक्षाओं के।
इसके बाद भी काफी देर तक एग्जाम शुरू नहीं हुआ। इस पर जब टीचर से पूछा गया तो पता चला कि स्कूल में चॉक ही नहीं है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम कहता है कि कक्षा एक से आठ तक किसी भी बच्चे से फीस न ली जाए।
आरटीई लागू हुआ तो परीक्षा शुल्क पर भी रोक लग गई लेकिन परीक्षा के लिए किसी प्रकार का बजट नहीं दिया। इस कारण ही स्कूलों में परीक्षाओं में लगातार खिलवाड़ होता जा रहा है।
हालांकि विद्यालय विकास अनुदान से परीक्षा खर्च देने का शासनादेश है लेकिन विद्यालयों का कहना है कि अनुदान में परीक्षा खर्च कहीं भी स्पष्ट नहीं किया गया है।
वहीं, शासनादेश के अनुसार, सभी बच्चों को प्रिंटेड प्रश्नपत्र और कॉपियां मिलनी चाहिए।
प्रश्नपत्र एससीईआरटी की वेबसाइट पर दिए गए मॉडल प्रश्नपत्रों के हिसाब से तैयार होने थे पर आननफानन शुरू हुई परीक्षा के कारण स्कूल स्तर पर ही प्रश्नपत्र तैयार किया गया।
शिक्षकों ने उठाया उत्तर पुस्तिका का खर्च
राज्य सरकार भले ही परीक्षा का खर्च नहीं देती पर कई स्कूलों में शिक्षकों ने उत्तर पुस्तिकाएं बच्चों से मंगाने के बजाय उसका खर्च खुद उठाया।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिकंदपुर अमौलिया, माल विकासखंड का प्राथमिक विद्यालय बांझी, मोहनलालगंज विकासखंड का प्राथमिक विद्यालय हरिखेड़ा समेत कई विद्यालयों में शिक्षकों ने आपस में चंदा लगाकर बच्चों को उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराईं।