छात्रों के लिए बुरी खबर, MBBS की 50 सीटें खारिज
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गर्वमेंट मेडिकल कालेज (जीएमसीएच) सेक्टर 32 में काउंसिलिंग से ठीक पहले एमबीबीएस की बढ़ने वाली 50 सीटों के खारिज होने की सूचना पर हंगामा हो गया। स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों ने संस्थान पर गुमराह करने का आरोप लगाया।
हंगामा बढ़ने पर संस्थान के डायरेक्टर प्रोफेसर अतुल सचदेवा को आना पड़ा। दूसरी ओर जीएमसीएच प्रबंधन का कहना था की मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) सीटें न बढ़ाए जाने की सूचना संस्थान को सोमवार को ही मिली है। प्रॉस्पेक्ट्स में भी यह स्पष्ट था कि ये सीटें निश्चित नहीं हैं और सिर्फ बढ़ने की संभावना है।
एमसीआई का बेतुका तर्क बना कारण
एससईआई की ओर से जो तर्क देकर सीटें खारिज की गई हैं, उस पर भी सवाल उठ रहे हैं। पिछले साल इन्फ्रास्ट्रक्चर को अच्छा बताते हुए पचास सीटें बढ़ाई गई थीं, इस बार उसे ही आधार बनाकर सीटें खारिज की गई हैं।
यह बात किसी के गले नहीं उतर रही। वह तब जब पिछले एक साल में जीएमसीएच-32 में कई सुविधाएं अपग्रेड हुई हैं और फेकल्टी और ओपीडी की संख्या भी बढ़ी है। एमसीआई की ओर से कहा गया है कि संस्थान के लेक्चर थिएटर और एनेटॉमी लैब छोटी है। इसलिए सीटें नहीं बढ़ाई जा सकतीं।
अभिभावकों की दलील
एमसीआई नहीं दे रहा था सूचना
कोट
प्रॉस्पेक्टस में साफ तौर लिखा गया था कि 50 से 100 सीट बढ़ने की संभावना है। ये सुनिश्चित नहीं हैं। सीटे कम होने की सूचना संस्थान को सोमवार को ही मिली। एमसीआई के इस फैसले से संस्थान को भी झटका लगा है। एमसीआई ने न तो फेकल्टी पर बात की और न ही सुविधाओं पर। नए ब्लाक बन रहे हैं। नए ब्लाक में सारी सुविधाएं हैं। अगले साल फिर से सीटों की अप्लाई करेंगे।
-प्रोफेसर अतुल सचदेवा, डायरेक्टर, जीएमसीएच-32
प्रोफेसर अतुल सचदेवा ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक 25 जून तक काउंसलिंग पूरी करनी थी। एमसीआई की ओर से सीटों के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी जा रही थी। कई बार संपर्क किया, लेकिन कुछ भी पता नहीं चला। बाद में शनिवार को स्टाफ मेंबर को भेजा गया। सोमवार सुबह ही स्टाफ मेंबर को सीटें खारिज होने के बारे में बताया, इसीलिए काउंसलिंग भी देरी से शुरू की गई थी।
प्रोस्पेक्ट्स में क्यों लिखा
मेडिकल विशेषज्ञों ने बताया कि जीएमसीएच 32 की ओर से संभावित 100 सीटे लिखने का फैसला बिल्कुल सही था। यदि 50 सीटे बढ़ जाती तो उन्हीं आवेदकों को प्राथमिकता मिलती, जिन्होंने आवेदन किया था।
संस्थान को आखिरी वक्त तक लग रहा था कि उसकी 100 सीटे बरकरार रहेंगी। इसलिए संस्थान ने आवेदन देने की बात कही थी। दरअसल सीटें बढ़ने के बाद एमसीआई कालेजों का दौरा करती और देखती है कि संस्थान में मेडिकल स्टूडेंट के लिए सुविधाएं हैं या फिर नहीं।
नाराज पेरेंट्स पहुंचे भाजपा कार्यालय, कोई नहीं मिला
काउंसलिंग के वक्त सीटे खारिज होने की सूचना से नाराज पेरेंट्स का कहना था कि संस्थान ने उन्हें गुमराह किया है। वे चुप नहीं बैठेंगे। कुछ देर हंगामा करने के बाद पेरेंट्स भाजपा कार्यालय पहुंच गए।
कार्यालय में वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन के माध्यम से सांसद किरण खेर तक अपनी बात पहुंचाना चाहते थे। करीब तीन बजे कार्यालय में कोई नहीं था और वे इंतजार करने लगे। बाद में कुछ पेरेंट्स ने संजय टंडन से बात की।