उत्तराखंड: खतरे में बीएड कर रहे छात्रों का भविष्य
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उत्तराखंड की श्रीदेव सुमन विवि के 2600 बीएड छात्रों का भविष्य परीक्षा न होने से अधर में लटक गया है।
कॉलेजों की ओर से बीते सत्र के दाखिलों में भारी गड़बड़ी के बाद से मामला शासन में लटका है। अब तक मामले में शासन ने रुख साफ नहीं किया है, इस वजह से छात्रों का सत्र शून्य होने के करीब है।
श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध 26 बीएड कॉलेजों में सत्र 2013-14 में 1300 सीटें सरकारी कोटे की और 1300 सीटें प्रबंधन कोटे की थीं। प्रबंधन कोटे की सीटों पर बीएड कॉलेजों ने अपने स्तर से दाखिले कर लिए।
इसके बाद श्रीदेव सुमन विवि की काउंसिलिंग के बाद बची हुई सरकारी कोटे की सीटों पर भी कॉलेजों ने खुद ही दाखिले कर लिए। नियमानुसार केवल विवि ही प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को यह सीटें आवंटित कर सकता था।
विवि ने जब कॉलेजों से जानकारी मांगी तो कॉलेजों की पोल खुल गई। आरक्षण नियमों की भी अनदेखी की गई। इस पर विवि ने दोबारा सही जानकारी मांगी तो कॉलेजों ने समय से उपलब्ध नहीं कराई।
शासन ने साफ नहीं किया अपना रुख
आखिरकार विवि ने राजभवन और शासन को पत्र भेज दिया कि नियमों की धज्जियां उड़ाने के इस मामले में वह अपना रुख साफ करें।
करीब दो महीने बीत गए, लेकिन अब तक शासन ने इस पर अपना रुख साफ नहीं किया है, जबकि विवि अब सत्र 2014-15 बीएड सत्र की परीक्षाएं कराने की तैयारी कर रहा है।
इन पुराने सत्र वाले छात्रों को इस बात की चिंता सता रही है कि उनका एक साल का बीएड अब तक डेढ़ साल पार कर चुका है। कहीं ऐसा न हो कि समय से परीक्षा न कराने पर सत्र ही शून्य हो जाए।
हमने सभी बीएड कालेजों की पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी हुई है। अभी तक वहां से कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही पता चलेगा तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. यूएस रावत, कुलपति, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि