गुरुजी ने क्लास बंक की तो कट जाएगी पगार
उत्तराखंड में अब गुरुजी ने क्लास बंक की तो उनकी पगार कट जाएगी। सरकार ने बाकयदा अधिसूचना जारी कर सरकारी और सहायता प्राप्त अशासकीय कॉलेजों में शिक्षकों की हाजिरी को अनिवार्य कर दिया है।
सरकार ने बायोमैट्रिक सिस्टम की अनिवार्यता से तो छूट दे दी है लेकिन प्रतिदिन होने वाली हाजिरी शिक्षा निदेशक और शासन को हर हाल शाम पांच बजे तक भेजनी होगी। प्रत्येक शिक्षक को प्रतिदिन पांच घंटे हर हाल शिक्षण कार्य करना होगा।
प्रदेश के 70 सरकारी के साथ 16 अशासकीय कॉलेज में यह व्यवस्था लागू होगी। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा मनीषा पंवार का कहना है कि एक जनहित याचिका केआधार पर उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार साल में 180 दिन पढ़ाई अनिवार्य होगी।
180 दिन की पढ़ाई अनिवार्य
अभी तक विश्वविद्यालय अपने स्तर पर 180 दिन का कैलेंडर बनाते भी थे लेकिन कॉलेजों के प्राचार्य उसे अपने स्तर पर बदल देते थे।
अब विश्वविद्यालय के कैंलेडर में निदेशक ही फेरबदल कर सकेगा। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पर्वतीय महाविद्यालय शीतावकाश के ध्यान में रखकर कैलेंडर तैयार करेंगे लेकिन 180 दिन की पढ़ाई अनिवार्य होगी। इसकी सूचना वेबसाइट पर डालनी होगी।
प्रमुख सचिव का कहना है कि कोई शिक्षक अगर पांच घंटे शिक्षण कार्य नहीं करेगा तो उसकी पगार में कटौती की जाएगी।
शिक्षकों की हाजिरी की सूचना प्रतिदिन प्राचार्य के हस्ताक्षर के साथ शाम पांच बजे तक ई-मेल, फैक्स, विशेष पत्रवाहक के माध्यम से निदेशालय और शासन को भेजनी होगी।
इसके लिए औचक निरीक्षण तथा नोडल अधिकारी के भ्रमण में बिना अवकाश स्वीकृत गैरहाजिर रहने वाले शिक्षक के वेतन कटौती के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी।
महाविद्यालयों में मशीनें लगाई गईं
दरअसल हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने हाजिरी केलिए बायोमैट्रिक सिस्टम लागू करने की बात कही थी। कुछ सरकारी महाविद्यालयों में मशीनें लगाई भी गई।
जिस पर शिक्षक संघों से जमकर विरोध जताया। अब सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जिन राजकीय या अशासकीय महाविद्यालयों में बायोमैट्रिक प्रणाली नहीं अपनाई जा रही है वहां केंद्रीयकृत रजिस्टर प्रणाली लागू की जाए।
ताकि प्राचार्य की देखरेख में शिक्षक के आने-जाने का समय अंकित हो। इस व्यवस्था को लागू करने का उत्तरदायी प्राचार्य होगा। अभी तक तमाम कॉलेज में शिक्षक अपने-अपने विभाग में ही रजिस्टर रखकर हाजिरी लगाते थे।
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि छात्रों के पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए सभी महाविद्यालयों के समस्त अध्यापक अपना शिक्षण कार्यक्रम यानि टीचिंग प्लान तैयार करेंगे। जिसे प्राचार्य अनुमोदित करेगा और 15 अगस्त तक निदेशालय को सूचित करेगा।
प्राचार्य इसे अपने हस्ताक्षर के साथ महाविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड भी करेंगे। कॉलेज में शैक्षिक माहौल बनाने के लिए परिचय पत्र, कॉलेज में किसी बाहरी के प्रवेश पर उसकी प्रवेशन पंजिका में जानकारी जैसे कदम भी उठाने को कहा गया है।