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कमाल है! 30 वर्षों से नहीं बदला यहां का कोर्स

Fri, 12 Sep 2014 11:25 AM IST
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 12 Sep 2014 11:25 AM IST
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arts college syllabus does not get changes.

समय और तकनीक के साथ कदमताल न कर पाने के कारण 102 वर्ष पुराने कला एवं शिल्प महाविद्यालय में कई कोर्स बंद होने की कगार पर हैं।

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किसी कोर्स का 30 वर्षों से कोर्स अपडेट नहीं हुआ तो कहीं आधुनिक मशीनों का अभाव।

नतीजतन, पहले जिन कोर्सेज से विवि की पहचान होती थी, प्रवेश के लिए मारा-मारी रहती थी, आज उन्हीं विषयों को एक भी छात्र नहीं मिल रहे हैं।

आज हालत यह है कि प्रोफेशनल डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स में मुश्किल से एक या दो स्टूडेंट ही प्रवेश ले रहे हैं। इसके पीछे कुछ हद तक सरकारी नीति भी जिम्मेदार है।

इंस्ट्रक्टर का पद खत्म किया और जो मानक पूरे करते थे, उन्हें प्रवक्ता बना दिया गया। इंस्ट्रक्टर सेवानिवृत्त होते चले गए। कुछ कोर्सेज ऐसे रह गए, जिनमें प्रवक्ता तैनात नहीं हुए। इस कारण ये कोर्स बंदी के कगार पर आ गए।
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कॉलेज में चलने वाले तीन कोर्स के लिए मात्र दो इंस्ट्रक्टर हैं। इनमें से एक अकेले डिप्लोमा इन फर्नीचर डिजाइन एंड इंटीरियर डेकोरेशन और डिप्लोमा इन वुड वर्क कोर्स को देख रहा है।
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दूसरा इंस्ट्रक्टर डिप्लोमा इन आयरन एंड हेवी मेटल वर्क में है। तीनों कोर्स में 10-10 सीटें हैं।

कॉलेज के शिक्षकों की मानें तो इसकी वजह से पिछले कुछ सालों में इन कोर्सेज में प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या बुरी तरह से प्रभावित हुई है।

जो भी स्टूडेंट यहां से इन कोर्सेज का डिप्लोमा लेकर जाते हैं, वे कभी अपने किसी परिचित को यहां आने की सलाह नहीं देते।

कॉलेज में पहले हर साल डिप्लोमा इन फर्नीचर डिजाइन एंड इंटीरियर डेकोरेशन और डिप्लोमा इन वुड वर्क कोर्स के स्टूडेंट्स के बनाए गए फर्नीचर व अन्य वर्क की प्रदर्शनी लगती थी। यह फर्नीचर बिक्री के लिए उपलब्ध होता था।

कॉलेज के एक शिक्षक जो कि यहां के छात्र भी रहे हैं, उन्होंने बताया कि जिस समय इस सामान की प्रदर्शनी लगती थी तो उसमें आने वाले लोग हाथों-हाथ खरीद लेते थे।


इससे स्टूडेंट्स और इंस्ट्रक्टर्स का मनोबल भी बढ़ता था। समय के साथ फैशन और ट्रेंड बदला। जरूरी था कि यहां इंस्ट्रक्टर भी स्टूडेंट्स को नई तरह के फर्नीचर व डिजाइन सिखाएं।

कोर्स के सिलेबस में आवश्यकता के अनुसार अपडेट किए जाएं लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

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