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शिक्षा के मंदिर में नहीं बिकेंगी किताबें

Fri, 04 Apr 2014 12:51 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 04 Apr 2014 12:51 PM IST
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arbitrary of public school in dehradun

देहरादून में पब्लिक स्कूलों की मनमानी चरम पर है। स्कूलों में किताबों की दुकानें सजाई जा रही हैं, फीस में मनमानी बढ़ोत्तरी की जा रही है।

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जबकि सीबीएसई ने पहले से ही इस तरह की गतिविधियों पर पाबंदी लगाई हुई है। सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून के मुताबिक इस प्रकार की गतिविधियों पर कार्रवाई भी हो सकती है।
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सीबीएसई के दिशा निर्देशों के मुताबिक कोई भी स्कूल अपने परिसर में किताब कॉपी की दुकान नहीं चला सकता। बोर्ड ने यह भी निर्देश दिया हुआ है कि केवल एनसीईआरटी की किताबें ही स्कूलों में पढ़ाई जाएंगी।

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इसके उलट कमाई के चक्कर में स्कूलों में सिर्फ प्राइवेट व महंगी किताबें चल रही हैं। फीस बढ़ाने के मामले पर भी बोर्ड का साफ निर्देश है कि उच्चतम न्यायालय के आदेशों के तहत एक साल में कोई भी स्कूल फीस में 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ोत्तरी नहीं कर सकता।

यह अलग बात है कि स्कूल ट्यूशन फीस के साथ ही दूसरी मदों में अलग से बढ़ोत्तरी कर रहे हैं। बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के अस्सिटेंट सेक्रेटरी रनबीर सिंह तोमर के मुताबिक ड्रेस के चयन के मामले में फैसला स्कूलों के हाथ में ही होता है।

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उनका कहना है कि नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में बोर्ड को अधिकार है कि वह स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

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सीबीएसई ने स्कूल परिसर में व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक लगाई हुई है। अगर किसी भी स्कूल में इस प्रकार की शिकायत सामने आ रही है तो वह सीधे बोर्ड के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय को लिखित शिकायत भेज सकते हैं। बोर्ड इसके बाद गलती के मुताबिक संबद्धता खत्म करने तक की कार्रवाई कर सकता है।
- प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, क्षेत्रीय निदेशक, सीबीएसई

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