फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   arbitrary of public school in dehradun

स्कूल में चल रहे धंधे पर शिक्षा विभाग का शिकंजा

Wed, 02 Apr 2014 10:20 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 02 Apr 2014 10:20 AM IST
विज्ञापन
arbitrary of public school in dehradun

देहरादून में पब्लिक स्कूलों की मनमानी पर आखिरकार शिक्षा विभाग नींद से जाग गया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी खाली ने जिला स्तरीय शिकायत निवारण प्रकोष्ठ गठित किया गया है।

विज्ञापन


जारी किया हेल्पलाइन नंबर
इसमें एक हेल्पलाइन नंबर के अलावा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के नंबर जारी किए हैं। अभिभावक सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

पढ़ें, ग्रहों ने सुना दिया लोकसभा चुनाव में हार-जीत का फैसला!
विज्ञापन


ऑल उत्तराखंड अभिभावक एसोसिएशन की शिकायत पर मुख्य शिक्षा अधिकारी ने सभी अशासकीय पब्लिक स्कूलों के प्रबंधकों को निर्देशित किया है कि विद्यालय परिसर में पुस्तकों व ड्रेस की बिक्री उचित नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अंकित मूल्य से अधिक धनराशि वसूलना दंडनीय है। प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि तत्काल वसूली पर रोक लगाई जाए। यदि किसी भी स्कूल से इस प्रकार की शिकायत प्राप्त हुई तो डीएम से स्कूल की मान्यता रद्द करने की संस्तुति की जाएगी।

पढ़ें, 'गुजरात से भी ज्यादा विकसित है उत्तराखंड'

सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वह विकास खंडों में स्थित पब्लिक स्कूलों को चेतावनी निर्गत करें और संबंधित उपजिलाधिकारी/तहसीलदार/थानाध्यक्ष से संपर्क करते हुए मनमानी पर रोक लगवाएं।

इनका रखें खास ख्याल
- किसी भी विद्यालयों में बच्चों के प्रवेश के लिए न तो कैपिटेशन फीस ली जाएगी और न ही प्रवेश के लिए आठवीं तक कोई स्क्रीनिंग की जा सकेगी।

चंदा या दान लेने की स्थिति में स्कूल से दस गुना अर्थदंड लिया जाएगा। पहली बार में 25 हजार और इसके बाद हर बार में 50 हजार रुपये जुर्माना होगा।

- बच्चों की उम्र का निर्धारण जन्म प्रमाण पत्र द्वारा किया जाएगा। प्रमाण पत्र के अभाव में किसी भी बच्चे को प्रवेश देने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

- मान्यता प्रदान की जाने वाली शर्तों का उल्लंघन करने पर विद्यालय की मान्यता रद्द की जा सकती है।
- आठवीं तक के किसी भी छात्र को फेल नहीं किया जा सकता। न ही प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने तक निष्कासित किया जा सकेगा।
- आरटीई से संबंधित शिकायत, विकासखंड स्तर, जिला स्तर पर की जा सकती है।
(आरटीई के तहत शिक्षा विभाग के निर्देश)

किताबें लेट तो विलंब शुल्क
दून के पब्लिक स्कूलों में अभिभावकों से अनोखे तरीकों से वसूली की जा रही है। किताबें खरीदने में देर हुई तो विकासनगर के एक स्कूल ने अभिभावक से जुर्माना वसूल लिया। तमाम अभिभावकों ने परेशानी अमर उजाला से साझा की।

पढ़ें, तंगहाली में चल बसीं उत्तराखंड के गांधी की पत्नी

एक अभिभावक को कारमन स्कूल प्रेमनगर की ओर से पांचवीं पास करते ही टीसी थमा दी गई है।

उन्हें आर्थिक दिक्कतों की वजह से शुल्क जमा करने में जरा देर हो गई थी। अभिभावक ने बहुत विरोध किया लेकिन स्कूल प्रशासन ने एक न सुनी।

इसी प्रकार इंडियन पब्लिक स्कूल में अभिभावकों की शिकायत है कि स्कूल परिसर में ही किताबों की दुकान सजाई गई है।

दून स्कॉटिश एकेडमी की अभिभावक ने बताया कि गत वर्ष अप्रैल माह में उनके बच्चे को दाखिला इस वादे पर दिया गया था कि छह माह बाद बच्चे को नर्सरी में प्रमोट कर दिया जाएगा।


पढ़ें, राजधानी देहरादून के स्कूलों में चलता है 'धंधा'

लेकिन एक साल तक स्कूल फीस वसूलता रहा लेकिन उसे प्रमोट नीं किया। स्कूल का तर्क था कि बच्चे की प्रोग्रेस धीमी थी, इसलिए पूरा साल लग गया।

क्लेमेंटटाउन के सेंट मैरी स्कूल के एक अभिभावक ने बताया कि उनसे तीन महीने की फीस वसूली जाती है। अगर एक दिन भी देर हो जाए तो 50 रुपए जुर्माना लगाया जाता है।

छोटी मदों में भी बढ़ोतरी
ग्रेस एकेडमी के एक अभिभावक ने आरोप लगाया कि स्कूल ने सालाना फीस बढ़ोतरी के साथ ही कंप्यूटर फीस, लाइब्रेरी फीस में भी बढ़ोतरी कर दी है।

बताया कि सालाना ट्यूशन फीस में नियमानुसार दस प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है लेकिन दूसरी मदों में मिलाकर यह हर साल की तरह भारी वृद्धि हो गई है।

जसवंत माडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल के अभिभावक ने शिकायत की है कि उन्हें स्कूल ने निर्देश दिया है कि दसवीं के बाद अब 11वीं में रि-एडमिशन के लिए आठ हजार रुपये देने होंगे।

एकजुट हुए अभिभावक
स्कूलों की मनमानी के विरोध में आल उत्तराखंड पैरेंट्स एसोसिएशन ने एक बैठक बुलाई। बैठक में स्कूलों पर लगाम लगाने की प्रशासन की कार्रवाई पर चर्चा की गई।

इसके अलावा गुरु नानक एकेडमी प्रेमनगर में की गई फीस बढ़ोत्तरी के विरोध में एसोसिएशन ने अभिभावकों का साथ देने का निर्णय लिया। अध्यक्ष नीरज सिंघल ने कहा कि यह फीस बढ़ोतरी गैर कानूनी है।

यदि स्कूल फीस बढ़ोतरी वापस नहीं लेता है तो आंदोलन चलाया जाएगा। बैठक में सुदेश उनियाल, रतन सिंह चौहान, संदीप भटनागर, देवेंद्र घड़ियाल, प्रमिला रावत, आशुकांत त्यागी, दाता राम जोशी, सलीम खान, हरजीत सिंह, उमेश वालिया आदि मौजूद रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed