बीएडः ये कैसी प्रवेश परीक्षा, सारे के सारे पास
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बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में लगभग सभी अभ्यर्थी क्वालीफाई हो गए हैं। 163250 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से 162564 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। सिर्फ 686 अभ्यर्थी असफल हुए। छह अभ्यर्थियों को नकल करते पकड़े जाने के कारण उन्हें परीक्षा से बाहर कर दिया गया था। बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में इलाहाबाद के अखिलेश कुमार दुबे ने 400 में से 339 अंक हासिल कर टॉप किया।
दूसरे व तीसरे नंबर पर इलाहाबाद के ही रामदत्त मिश्रा व जितेंद्र द्विवेदी रहे। गर्ल्स में कानपुर की कमलप्रीत कौर टॉपर रहीं। राजधानी लखनऊ के कुलदीप सिंह भदौरिया 15 वें नंबर पर रहे। बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा का परिणाम सोमवार दोपहर करीब 3 बजे घोषित किया जाना था लेकिन रात 9:15 बजे ऑनलाइन हो पाया। वेबसाइट www.upbed.nic.in पर रिजल्ट के लिए दोपहर से ही अभ्यर्थी क्लिक करते रहे।
बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन इस बार लखनऊ विश्वविद्यालय ने करवाया था। परीक्षा के को-ऑर्डिनेटर प्रो. वाईके शर्मा ने बताया कि तकनीकी खामी के चलते एनआईसी समय से रिजल्ट वेबसाइट पर अपलोड नहीं कर पाया।
प्रो. वाईके शर्मा ने बताया कि प्रवेश परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की काउंसलिंग एक जून से शुरू होकर 25 जून तक चलेगी। काउंसलिंग से पहले सीटों का ब्यौरा ऑनलाइन कर दिया जाएगा। काउंसलिंग में शामिल हुए अभ्यर्थी अपने आवंटित बीएड कॉलेज में 28 जून तक दाखिला ले सकेंगे। 1 जुलाई से बीएड का नया सत्र शुरू होगा। इस बार से बीएड दो साल का हो गया है।
जानिए टॉपर्स क्या कहते हैं
बीएड प्रवेश परीक्षा में 15 वीं रैंक पर रहे कुलदीप सिंह भदौरिया कहते हैं कि
पहले सरकारी स्कूलों के शिक्षक बेहतर शिक्षा देकर अपने शिष्य को ऊंचाइयों तक पहुंचाते थे, मगर अब शिक्षकों की छवि ऐसी नहीं रही।
ऐसे में मेरा मकसद एक अच्छा शिक्षक बनने का है। मैं आगे चलकर एक ऐसा आदर्श स्कूल खोलना चाहता हूं, जहां बच्चों को प्रायोगिक शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कराई जा सके। मूल रूप से फतेहपुर के रहने वाले कुलदीप ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एमए हिस्ट्री की पढ़ाई की है और फिलहाल एक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ाते भी हैं। वे आकाशवाणी में एनाउंसर भी हैं।
इस परीक्षा में 37 वीं रैंक पर रही नैन्सी पांडेय कहती हैं बचपन से मेरा सपना शिक्षक बनने का है। बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा तभी मिलेगी जब शिक्षक अनुशासन के साथ क्लास में पढ़ाएंगे। आज के दौर में लोग डॉक्टर व इंजीनियर आदि बनने के लिए अंधी दौड़ में भाग रहे हैं, मगर अच्छा शिक्षक बनकर देश के भविष्य को संवारने के लिए बहुत कम लोग ही आगे आते हैं। मूल रूप से बहराइच की रहने वाली नैन्सी कहती हैं, इसीलिए मैंने बीकॉम व एमकॉम की पढ़ाई के बाद बीएड करने का फैसला किया।