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बीएड में अब कोटे की सीटों पर दाखिले की रार

Wed, 02 Oct 2013 10:17 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
टीम डिजिटल/लखनऊ Updated Wed, 02 Oct 2013 10:17 AM IST
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बीएड दाखिलों में अब एससी-एसटी कोटे की सीटों को

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लेकर नई रार छिड़ गई है।

मामला करीब दस हजार आरक्षित छात्रों का है। इस बार आरक्षित अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के दौरान सिक्योरिटी मनी नहीं जमा करनी थी।

कॉलेजों का कहना है कि इससे वे कई बार काउंसलिंग में तो शामिल हो गए लेकिन उन्होंने दाखिला नहीं लिया। वे अगली काउंसलिंग में अच्छे कॉलेज का इंतजार करते रहे।

वहीं गोरखपुर विश्वविद्यालय का कहना है कि जो काउंसलिंग में शामिल हो गया उस सीट को वह भरी हुई मानेगा। दोबारा सीधे दाखिले से उस सीट को कॉलेज नहीं भर सकते।


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बीएड में इस साल कुल एक लाख, 22 हजार, 800 सीटों के लिए करीब तीन लाख, 40 हजार अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए थे। पहली काउंसलिंग के बाद करीब 57 हजार सीटें खाली रह गई थीं।

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उसके बाद दूसरी और तीसरी काउंसलिंग कराई गई। फिर भी 35 हजार सीटें खाली रह गई हैं। शासन ने अब कॉलेजों को ही मेरिट के आधार पर सीधे सीटें भरने की छूट दे दी है।

यह है विवाद
कॉलेज जब सीधे सीटें भर रहे हैं तो ऐसे में एससी-एसटी सीटों पर दाखिला का विवाद शुरू हो गया। काउंसलिंग कराने वाले गोरखपुर विश्वविद्यालय का कहना है कि कॉलेज जानबूझकर उन्हें दाखिला नहीं देना चाह रहे।

अभ्यर्थियों ने काउंसलिंग में कॉलेज चुने हैं तो वह सीटें तभी भर गई थीं। वहीं कॉलेजों का तर्क है कि आरक्षित अभ्यर्थियों को इस बार न तो पूरी फीस जमा करनी थी और न सिक्योरिटी मनी।

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वहीं सामान्य अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के दौरान ही 51,250 रुपए फीस जमा करनी थी। यही वजह है कि वे अपनी नजदीकी कॉलेज के इंतजार में बैठे रहे और काउंसिलिंग में कॉलेज चुनने के बाद वहां दाखिला लेने नहीं गए।

पिछले साल तक एससी/एसटी अभ्यर्थियों केलिए भी पांच हजार रुपये सिक्योरिटी मनी जमा करनी होती थी।

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कॉलेजों का यह भी कहना है कि यदि गोरखपुर विश्वविद्यालय इन 10 हजार सीटों को भरी हुई मान रहा है तो हमें फीस की प्रतिपूर्ति कराए या फिर सीधे उसकी जगह खाली सीट पर दाखिला करने दे।

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