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हिमाचल में तगड़े प्रबंधों के बीच हुई AIPMT परीक्षा

Sat, 25 Jul 2015 10:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 25 Jul 2015 10:13 PM IST
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AIPMT exam in himachal.

हिमाचल के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर शनिवार को हजारों अभ्यर्थी एआपीएमटी (रि-कंडक्ट) में बैठे। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी आदेशों के बाद सभी केंद्रों में मेटल और बग डिटेक्टरों से गेट पर ही अभ्यर्थियों की चेकिंग हुई। राजधानी शिमला में 11 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा हुई। सुबह तय साढ़े सात से लेकर साढ़े नौ बजे तक परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति थी।

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केंद्रों में मोबाइल जैमर लगाए गए थे। परीक्षा संचालन के लिए सीबीएससी से आए पर्यवेक्षकों ने परीक्षा केंद्र की हर हरकत पर नजर रखी। परीक्षा के लिए बनाई गई सिटी कोआर्डिनेटर सेंट थॉमस स्कूल की प्रधानाचार्य विदुप्रिया चक्रवर्ती और सीबीएसई की ओर से आई टीम के सदस्यों ने सभी परीक्षा केंद्रों में जा कर निरीक्षण किया और परीक्षा संचालन व्यवस्था का जायजा लिया। सुबह दस बजे से एक बजे तक परीक्षा हुई।
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देरी से आने पर वंचित रह गए कई अभ्यर्थी
तय समय के बाद इन सेंटरों में आए परीक्षार्थियों को प्रवेश नहीं दिया गया। इस कारण सैकड़ों परीक्षार्थियों का परीक्षा देने का मौका हाथ से जाता रहा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर दोबारा करवाई जा रही इस अभ्यर्थियों को आधी बाजू के कपड़े और चप्पल तथा सैंडल पहनकर आने को कहा गया था। हेयर पिन, नोज पिन सहित अन्य सभी प्रतिबंधित चीजों के इस्तेमाल न किया जाना परीक्षा में  सुनिश्चित किया गया।
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राजधानी में इन परीक्षा केंद्रों में हुई परीक्षा
दयानंद पब्लिक स्कूल, लोरेटो कान्वेंट ताराहाल, चैप्सली स्कूल भराड़ी, कानवेंट ऑफ जीजस एंड मेरी, सरस्वती पैराडाइज, केंद्रीय तिब्तियन विद्यालय छोटा शिमला, केंद्रीय विद्यालय जाखु, डीएवी लक्कड़ बाजार, डीएवी न्यू शिमला, गर्वनमेंट ब्वॉयज स्कूल लालपानी, सेंट एडवर्ड स्कूल में परीक्षा हुई।


पहली बार हुआ मेटल डिटेक्टर का प्रयोग
ऑल इंडिया प्री- मेडिकल टेस्ट (एआईपीएमटी-2015) में नकल के लिए मोबाइल फोन, इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस, ब्लूटूथ, माइक्रोफोन, माइक्रोचिप तथा इयरफोन समेत अन्य इलेक्ट्रानिक्स सामान के इस्तेमाल को रोकने के लिए पहली बार मेटल डिटेक्टर का प्रयोग हुआ। जूतों के बजाय सभी विद्यार्थियों को चप्पलों में परीक्षा देने आने के निर्देश जारी किए गए थे। तलाशी के बाद ही परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश की अनुमति दी गई।

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