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डेढ़ साल बाद 'यूआईपीएस में नियुक्ति' सुलझने के आसार
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 21 Dec 2013 09:43 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की कमी है। अगर नियुक्ति होती है तो वह लटक जाती है।
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यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंस (यूआईपीएस) में एक सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति डेढ़ सालों से लटकी हुई है।
इस पद के लिए जिस उम्मीदवार का चयन हुआ उसने ज्वाइन करने से मना कर दिया। इसके बाद वेटिंग लिस्ट में जिस उम्मीदवार का नाम शामिल था उसे पीयू प्रशासन ने छह माह के निर्धारित समय में नियुक्ति पत्र नहीं दिया।
सिंडीकेट ने नियमों के खिलाफ इस नियुक्ति में छूट देने से मना कर दिया। सीनेट ने इस फैसले को पलट दिया और उसे दोबारा से सिंडीकेट के पास विचार के लिए भेज दिया।
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अब नवगठित सिंडीकेट की 4 जनवरी को बैठक में यूआईपीएस में असिसटेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए नियमों में छूट दी जा सकती है।
यूआईपीएस में सहायक प्रोफेसर पद के लिए हुई नियुक्ति का मामला सिंडीकेट की बैठक में 8 सितंबर, 2012 को मंजूरी के लिए आया था।
सिंडीकेट ने इस पद पर हुई डॉ. राज कुमार की नियुक्ति को मंजूरी दे दी। डॉ. राज कुमार ने ज्वाइन करने के लिए दो बार पीयू से समय मांगा।
7 मार्च, 2013 को उन्होंने पीयू को पत्र भेजकर इस पद पर ज्वाइन करने में असमर्थता जता दी। पीयू प्रशासन ने वेटिंग लिस्ट में शामिल सुरेश थरेजा को तुरंत नियुक्ति पत्र भेजना चाहिए था क्योंकि छह महीने का समय उसी दिन खत्म हो रहा था।
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पीयू के नियमों के अनुसार सिंडीकेट की ओर से जो नियुक्ति मंजूर की जाती है वह छह महीने के लिए वैध होती है। पीयू के ऑफिस की गलती के कारण थरेजा की नियुक्ति लटक गई।
इसके बाद पीयू के कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर इस मामले को सिंडीकेट के समक्ष लाए ताकि नियमों में छूट देकर थरेजा को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया जाए।
सिंडीकेट ने ऐसा करने की मंजूरी नहीं थी। थरेजा ने पीयू को पहले लीगल नोटिस भेजा और इसके बाद पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की।
इसके बाद 8 अक्तूबर की सिंडीकेट में मामला दोबारा से विचार के लिए आया। लेकिन, सिंडीकेट ने विचार करने से मना कर दिया।
इसके बाद सीनेट की इस माह हुई बैठक में इस मामले को सिंडीकेट को दोबारा से विचार के लिए भेज दिया गया। अब नई सिंडीकेट यह तय करेगी कि नियमों में छूट देकर थरेजा को नियुक्ति देनी है या नहीं?