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जामिया ने कोर्ट में कहा, टॉपर को परीक्षा की अनुमति नहीं!

Fri, 24 Jan 2014 12:53 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 24 Jan 2014 12:53 PM IST
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after diciplinary action course topper student can not participate in exams

दिल्ली हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को जामिया मिलिया इस्लामिया की ओर से

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बयान दिया गया कि निष्कासित छात्र के साथ नरमी से पेश नहीं आ सकते थे।

जामिया का कहना है कि छात्र ऐसी गतिविधियों में शामिल था, जिससे विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा होने की आशंका थी। याचिका दायर कर छात्र ने परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की मांग की है। छात्रा का कहना है कि वह कोर्स का टॉपर है और बीपीएल परिवार से है।

जामिया की अनुशासन समिति ने एमटेक के द्वितीय वर्ष के छात्र को पर्चे चिपकाने और धार्मिक प्रवचन देने के लिए वक्ता को आमंत्रित करने का दोषी मानते हुए दो वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया था।
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मुख्य न्यायाधीश एनवी रामना की पीठ के समक्ष जामिया के अधिवक्ता एम. अतयाब सिद्दीकी ने कहा कि जामिया एक अलग तरह का विश्वविद्यालय है। इस तरह की गतिविधियों से यहां परेशानी हो सकती है। इसके आसपास बसी कॉलोनियों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की बहुलता है।
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छात्र से नरमी से पेश आने से लोगों में गलत संदेश जाता। काफी कोशिशों के बाद जामिया में माहौल को सामान्य बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में कई चरणों में हुई घटनाओं के बाद हालात अभी भी पूरी संभले नहीं हैं। इसके मद्देनजर अनुशासन समिति ने छात्र के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया था।


निष्कासित छात्र ने इस आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट के सिंगल जज ने पर्चों की विषयवस्तु के मद्देनजर छात्र को कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया था। सिंगल जज के निर्णय को छात्र ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने छात्र की मांग के मद्देनजर उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति देने पर विचार करने के लिए विश्वविद्यालय को कहा है क्योंकि इसके लिए छात्र को कक्षाओं में हाजिर होने की जरूरत नहीं है।

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