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फर्जी एडमिशन के बाद दोबारा दाखिले शुरु करने की मांग

Mon, 03 Aug 2015 08:27 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 03 Aug 2015 08:27 AM IST
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 After bogus admission Seeking to start admission again.
दिल्ली विश्वविद्यालय में फर्जी दाखिले के खुलासे के बाद एक बार फिर आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए केंद्रीयकृत दाखिला प्रक्रिया की मांग शुरू हो गई है।
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कॉलेजों में सामने आए दाखिले में फर्जीवाड़े को लेकर डीयू प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे हैं। विशेषकर अनुसूचित जाति जनजाति के फर्जी दस्तावेज के आधार पर दाखिले लेने पर।

इससे कॉलेजों में दाखिला पा रहे विद्यार्थियों के चलते इस कोटे के हकदार छात्रों को नुकसान हो रहा है। डीयू के एससी, एसटी टीचर्स फोरम ने बीते सालों में अनुसूचित जाति-जनजाति छात्रों के लिए डीन छात्र कल्याण कार्यालय के माध्यम से चलने वाली केंद्रीयकृत दाखिला प्रक्रिया को फिर से बहाल करने की मांग की है।

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फोरम के प्रमुख हंसराज सुमन का कहना है कि उस व्यवस्था में कोटे के छात्रों का पंजीकरण होता था। दस्तावेज की जांच के बाद उन्हें कॉलेज स्तर पर चुने गए कोर्स के हिसाब से दाखिला स्लिप दी जाती थी।

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'मौजूदा व्यवस्था आरक्षण विरोधी है'

 After bogus admission Seeking to start admission again.

पिछले दो-तीन सालों से ये व्यवस्था बंद कर दी गई है। इसी का नतीजा है कॉलेज मे दस्तावेज की जांच की व्यवस्था न होने का लाभ दाखिला माफिया उठा रहे हैं।

प्रोफेसर सुमन का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था आरक्षण विरोधी है और इसे तुरंत वापस लिए जाने की जरूरत है क्योंकि इससे जरूरतमंद को उसका लाभ नहीं मिल रहा है।

केंद्रीयकृत दाखिला प्रक्रिया को खत्म किए जाने के विषय में डिप्टी डीन छात्र कल्याण डॉ. गुरप्रीत सिंह टुटेजा का कहना है कि छात्रों की मांग पर ही ये निर्णय लिया गया था।

उनके मुताबिक छात्रों का कहना था कि उन्हें केन्द्रीयकृत व्यवस्था में कोर्स व कॉलेज चुनने की आजादी नहीं मिलती है और एक बार यदि कहीं दाखिला ले लिया तो फिर कोर्स व कॉलेज बदलने में परेशानी होती है।

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