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उत्तराखंड बोर्ड के ‘होनहार’ भी दाखिले से महरूम

Sun, 10 Aug 2014 12:04 PM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 10 Aug 2014 12:04 PM IST
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admission problem in uttarakhand

नैनीताल हाईकोर्ट की ओर से अनुमन्य सीटों पर दाखिले का नियम तो लागू हो गया लेकिन उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों के हाथ से मेरिट दूर हो गई है।

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दाखिले के लिए भटक रहे
एसजीआरआर पीजी कॉलेज में तो इंस्पायर अवार्ड के लिए योग्य उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों को भी मेरिट में जगह नहीं मिल पा रही है। ऐसे में उत्तराखंड बोर्ड के ‘होनहार’ छात्र भी दाखिले के लिए भटक रहे हैं। वहीं, डीबीएस कॉलेज की मेरिट में भी उत्तराखंड बोर्ड के बजाए सीबीएसई और आईएससी का कब्जा है।
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प्रदेश के महाविद्यालयों में केवल अनुमन्य सीटों पर दाखिले का आदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिया है।
एसजीआरआर पीजी कॉलेज और डीबीएस पीजी कॉलेज में मेरिट पर दाखिले शुरू हो गए हैं, लेकिन उत्तराखंड बोर्ड के छात्र मेरिट से बाहर हो गए।

एसजीआरआर में बीएससी की मेरिट 73 प्रतिशत पर रुकी है। जानकारी के मुताबिक 95 प्रतिशत सीटों पर सीबीएसई और आईएससी बोर्ड के छात्रों का कब्जा है। उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों को भारी नुकसान हुआ है।
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इसी तरह डीबीएस पीजी कॉलेज की मेरिट में भी यूके बोर्ड के छात्रों की संख्या कम है। जानकारी के मुताबिक यहां भी 90 प्रतिशत से ज्यादा सीटों पर सीबीएसई और आईएससी बोर्ड के छात्रों ने कब्जा जमाया है। मेरिट 78 प्रतिशत पर रुकी होने से 78 प्रतिशत तक वाले छात्र दाखिले से महरूम हैं।

नहीं मिल रही पांच प्रतिशत की छूट
यूपी के समय में सभी कॉलेजों में यूपी बोर्ड के छात्रों को दाखिले में पांच प्रतिशत का वेटेज मिलता था। उत्तराखंड बनने के बाद इस प्रावधान का पालन होता नजर नहीं आया। हालांकि, इस बार डीएवी कॉलेज ने उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों को पांच प्रतिशत का वेटेज देने की घोषणा की है, लेकिन बाकी कॉलेजों में बिना किसी वेटेज के ही मेरिट तैयार हो गई है।

दाखिला मिले तो मिलेगी स्कॉलरशिप
केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की ओर से उत्तराखंड बोर्ड के 71.6 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्रों को इंस्पायर स्कॉलरशिप का सर्टिफिकेट दिया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि विज्ञान की पढ़ाई के लिए इन छात्रों को 80 हजार रुपये सालाना की छात्रवृत्ति केंद्र से मिलेगी, लेकिन ऐसे छात्रों का दून के कॉलेजों में दाखिला हीं नहीं मिल पा रहा है। छात्र अपना सर्टिफिकेट हाथ में लेकर चक्कर काटने को मजबूर हैं।

निश्चित तौर पर डीएसटी सर्टिफिकेट प्राप्त छात्र भी मेरिट की होड़ में पिछड़ गए हैं। सरकार अगर इनके लिए कोई छूट देगी तो वह मेरिट में शामिल कर ली जाएगी। अभी तक इस प्रकार के निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।

- डा. अतुल सिंह, कार्यवाहक प्राचार्य, एसजीआरआर पीजी कॉलेज

हमने विश्वविद्यालय और शासन को इस संदर्भ में पत्र भेज दिया था। गढ़वाल विवि की एडमिशन कमेटी की मीटिंग में यूके बोर्ड के छात्रों का मुद्दा उठाया था। शिक्षा निदेशक से भी बात की थी। अभी तक कहीं से भी वेटेज के बारे में निर्देश नहीं मिले हैं। अगर शासन लिखकर दे तो हम यूके बोर्ड के छात्रों को वेटेज देने को तैयार हैं।
- डा. ओपी कुलश्रेष्ठ, प्राचार्य, डीबीएस पीजी कॉलेज

यूके बोर्ड के छात्रों के औसत अंक 55 प्रतिशत होते हैं लेकिन अन्य बोर्ड में औसत अंक 65 से 70 प्रतिशत आते हैं। इस लिहाज से प्रदेश सरकार को यूके बोर्ड के छात्रों के लिए 20 प्रतिशत का वेटेज देना चाहिए। नहीं तो भारी संख्या में अपने प्रदेश के छात्र दाखिलों से महरूम रह जाएंगे।
- आदित्य चौहान, पूर्व छात्र नेता, एबीवीपी

(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-aftaba@ddn.amarujala.com और इस नंबर-8392922180 पर संपर्क कर सकते हैं।)

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