सीटें बढ़ने के बाद भी क्यों नहीं मिल पा रहे हैं दाखिले
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एलयू में 25 अगस्त को हुई प्रवेश समिति की बैठक में कॉलेजों में सीटें बढ़ाने का निर्णय तो ले लिया गया लेकिन अभी तक कुछ कॉलेजों को इस संबंध में विश्वविद्यालय का पत्र ही नहीं मिला। इसकी वजह से कॉलेज अपने यहां बढ़ी सीटों पर प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं।
रोजाना न जाने कितने ही अभ्यर्थी कॉलेजों में बढ़ी सीटों पर प्रवेश की जानकारी लेने जाते हैं लेकिन उनको ये कहकर वापस लौटाया जाता है कि विवि से पत्र आने के बाद ही प्रक्रिया शुरू होगी।
वहीं कुछ कॉलेजों ने खुद विश्वविद्यालय जाकर अब पत्र लिया है। कुलाधिपति राज्यपाल राम नाईक ने 27 जुलाई को कुलपतियों के साथ हुई बैठक में साफ निर्देश दिए थे कि सभी जगह 31 अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। लेकिन एलयू की लापरवाही में अभी बढ़ी सीटों के प्रवेश होना अब तक बाकी हैं।
प्रवेश को लेकर अभ्यर्थियों में संशय
प्रवेश समिति के निर्णय के अनुसार कॉलेजों में सेल्फ फाइनेंस के जिन कोर्स में 60 सीट का सेक्शन था उसे बढ़ाकर 80 तक करने का निर्णय लिया गया। इससे राजधानी के करीब 10 कॉलेजों में बीए, बीएससी और बीकॉम की लगभग एक हजार सीटें बढ़ी हैं।
यह जानकारी मिलने के बाद उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली थी जो अभी तक प्रवेश की राह तक रहे हैं। लेकिन निर्णय को लगभग 9 दिन बीत जाने के बाद भी इन सीटों पर प्रवेश शुरू नहीं हुए।
इसकी वजह से अब अभ्यर्थी इस उलझन में हैं कि उनका प्रवेश हो भी पाएगा या नहीं? इस मामले में कॉलेजों के सामने भी समस्या आ रही है। एक तरफ अभ्यर्थी दबाव बना रहे हैं कि सीटें बढ़ गई तो प्रवेश क्यों नहीं लिया जा रहा।
दूसरी तरफ कॉलेज लिखित अनुमति न होने से प्रवेश नहीं कर पा रहे। शिया कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नकवी ने बताया कि उनके यहां पत्र न आने से प्रवेश रुके हुए हैं।
क्योंकि बिना पत्र के स्थिति क्लियर नहीं कि किस कोर्स में कितनी सीटें बढ़ाई गई हैं। वहीं जेएनपीजी कॉलेज के प्राचार्य एसडी शर्मा ने बताया कि उन्होंने खुद विवि जाकर पत्र लिया जिससे कि प्रवेश किए जा सकें।