उत्तराखंड के होनहारों की विदेश में धमक
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अगर आप विदेशी विश्वविद्यालयों में भविष्य सोच रहे हैं तो पैसा और परसेंटेज राह का रोड़ा नहीं बनेंगे। विदेशों में न तो हाई परसेंटेज कोई मायने रखती है, न ही शिक्षा शुल्क।
प्रवेश परीक्षा में पास होने पर दाखिला मिल जाता है और अच्छे अंक पाने पर शानदार छात्रवृत्ति भी। विशेषज्ञों की मानें तो विदेश में पढ़ाई का एक साल का खर्चा भी उतना ही बैठता है, जितना अपने देश में किसी इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ाई का।
ये हैं खास एग्जाम
एसएटी: 12वीं के बाद विदेशी विवि से ग्रेजुएशन में दाखिले के लिए एसएटी एग्जाम होता है। इसमें शामिल होने के लिए 12वीं में छात्र के पासिंग मार्क्स होना पर्याप्त है। हर साल जनवरी, मई, जून, अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर में परीक्षा केंद्र द दून स्कूल में यह एग्जाम होता है। इसका शुल्क 94.5 डालर है। पास छात्रों को स्कालरशिप भी मिलती है।
ग्रेजुएट रिकॉर्ड एग्जाम: पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में दाखिले के लिए ग्रेजुएशन रिकॉर्ड एग्जाम होता है, इसमें भी सिर्फ पासिंग मार्क्स होने चाहिए। सालभर ऑनलाइन होने वाले इस एग्जाम की फीस 195 यूएस डॉलर है। पीएचडी के लिए भी इसी परीक्षा से एंट्री मिलती है।
ग्रेजुएट मैनेजमेंट टेस्ट: विदेशी विवि में एमबीए में दाखिले के लिए ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट होता है, जिसका शुल्क 250 डॉलर है। विदेश में दाखिले की यह सबसे मुश्किल परीक्षा है। सालभर ऑनलाइन एग्जाम चलता है।
पैसा भी बाधा नहीं
विदेशी विवि की परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले जंबूरी एजूकेशन के निदेशक पंकज तलवार ने बताया कि प्रवेश परीक्षा में अच्छे स्कोर पर कई विश्वविद्यालय स्कॉलरशिप देते हैं।
कई तो 100 प्रतिशत तक देते हैं, जिसमें भारत से आने-जाने, वहां रहने-खाने का खर्चा भी शामिल है। कई शिक्षण संस्थानों में छात्रों को प्रति सप्ताह 16 घंटे परिसर में काम करने का मौका मिलता है, जिससे वे प्रतिमाह 300 से 400 डॉलर कमा लेते हैं।
इससे बाहर रहने पर उनका खर्चा भी कम हो जाता है। तलवार बताते हैं कि भारत के इंजीनियरिंग कालेज में सालाना चार लाख शुल्क जाता है, जबकि विदेशी विवि में भी वार्षिक खर्चा इतना ही रहता है।
उत्तराखंड के युवाओं की विदेशी विवि में धमक
एक बार फिर उत्तराखंड के युवाओं ने विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रतिभा का जलवा दिखाया है। विदेशी शिक्षण संस्थानों में दाखिले को होने वाली परीक्षाओं में प्रदेश के होनहारों ने जबर्दस्त सफलता हासिल की है। कई युवाओं को स्कॉलरशिप के साथ दाखिला मिला है।
विदेशी शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए 12वीं के बाद सैट, ग्रेजुएशन के बाद जीआरई (ग्रेजुएट रिकॉर्ड एग्जामिनेशन) और एमबीए के लिए जीमैट (ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट) आयोजित होता है। स्कोर के आधार पर विदेशी विश्वविद्यालय भारतीय छात्रों को पढ़ने का मौका देते हैं। खास बात यह है कि इस बार दून के स्कूलों से भी छात्रों को एंट्री मिली है।
इन्होंने पाया विदेश का टिकट
सिद्धार्थ नवानी, दीपिका नंदी, वत्सल वर्मा, सागर यादव, शांतनु सक्सेना, अर्पित चौधरी, उदित तोमर, सुमित चोपड़ा, अर्णव रांगड़, कुशाग्र अग्रवाल, देवाशीष जोशी, भव्या अरोड़ा।