{"_id":"9b65f443dd726dc77c6fd238dfbc1652","slug":"admission-dav-pg-college-dehradun","type":"story","status":"publish","title_hn":"कॉलेज में ब्लैक किए जा रहे हैं एडमिशन फॉर्म","category":{"title":"Campus Archives","title_hn":"कैंपस आर्काइव","slug":"campus-archives"}}
कॉलेज में ब्लैक किए जा रहे हैं एडमिशन फॉर्म
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 18 Jul 2014 12:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज में प्रास्पेक्टस की बिक्री कॉलेज के साथ कुछ छात्रनेताओं की भी कमाई का जरिया बन गई है।
विज्ञापन
अतिरिक्त रुपए वसूल कर प्रास्पेक्टस किया जा रहा ब्लैक
कतार में लगे छात्र बैरंग लौट रहे हैं, जबकि छात्रनेता बल्क में सैकड़ों फार्म खरीद रहे हैं। काउंटर पर फार्म खत्म हो जाने के बाद दस से बीस रुपए अतिरिक्त वसूल कर प्रास्पेक्टस ब्लैक किया जा रहा है।
मजबूरी में दूरदराज से आने वाले छात्र-छात्राएं 40 रुपये के प्रास्पेक्टस के 50 से 60 रुपए तक देकर अपना दिन बचा रहे हैं।
डीएवी कॉलेज में विभिन्न पाठ्यक्रमों में द्वितीय और तृतीय वर्ष के लिए बुधवार से एडमिशन फॉर्मों की बिक्री शुरू हुई। पहले ही दिन 2000 फॉर्म बिक गए थे, लेकिन इनमें से अधिकतर फॉर्म छात्रनेताओं ने खरीदे थे।
विज्ञापन
फॉर्म बिक्री काउंटरों पर भीड़
गुरुवार को सुबह कॉलेज खुलते ही दोनों फॉर्म बिक्री काउंटरों पर भीड़ जुट गई थी। लेकिन गुरुवार को भी कई छात्रनेता और अन्य छात्र दर्जनों फॉर्म खरीदते रहे।
विज्ञापन
तीन हजार फॉर्म बिकने के बाद खत्म होने की बात कहकर काउंटर बंद कर दिए गए, जबकि बाहर सैकड़ों छात्र तब भी कतार में थे। इसके बाद कॉलेज में कई छात्र प्रास्पेक्टस ब्लैक करते नजर आए।
कॉलेज में दाखिले के लिए जौनसार बावर समेत दूरदराज से छात्र आते हैं। फॉर्म न मिलने पर उन्हें अगले दिन फिर आना होता। ऐसे में अधिकतर छात्रों ने अतिरिक्त रकम देकर प्रास्पेक्टस खरीदना ही मुनासिब समझा।
बल्क खरीद पर रोक नहीं
सामान्य छात्रों के घंटों कतार में लगने के बाद भी फॉर्म न मिलने और प्रास्पेक्टस ब्लैक किए जाने के पीछे बड़ी वजह छात्रनेताओं का बल्क में फॉर्म खरीदना है।
सूत्र बताते हैं कि कालेज प्रशासन भी इस सच से वाकिफ है, लेकिन छात्रनेताओं के दबाव में चुप्पी साधे रहता है। अगर बल्क खरीद पर रोक लगे तो छात्र काउंटर से ही आसानी से फॉर्म खरीद सकते हैं।
दो दिन में 5000 प्रास्पेक्टस बिक चुके हैं। अगर कोई छात्र ब्लैक कर रहा है तो यह गलत है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। छात्र ध्यान रखें कि किसी के बहकावे में न आएं। सीधे विंडो पर आकर ही प्रास्पेक्टस खरीदें।
- डॉ. देवेंद्र भसीन, प्राचार्य
(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-aftaba@ddn.amarujala.com और इस नंबर-8392922180 पर संपर्क कर सकते हैं।)