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काउंसिलिंग से दूर रहे निजी मेडिकल कॉलेज

Sat, 27 Jul 2013 12:09 PM IST
Updated Sat, 27 Jul 2013 12:09 PM IST
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private medical colleges maintain distance from counselling

मेडिकल की पढ़ाई के लिए निजी मेडिकल कॉलेज ने पहले चरण की काउंसलिंग से दूरी बनाए रखी। इसमें केवल तीन डेंटल कॉलेज ने ही हिस्सा लिया।

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ऐसे में अब भी एमबीबीएस की करीब 1800 और बीडीएस की 2500 सीटों पर प्रवेश देने पर निर्णय होना बाकी है।

प्रदेश में निजी क्षेत्र में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए 15 मेडिकल कॉलेज और बीडीएस कोर्स के लिए 25 डेंटल कॉलेज हैं।

इन 15 मेडिकल कॉलेजों में करीब 1800 एमबीबीएस की सीटों को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा से अनुमति मिली हुई है। वहीं, 25 डेंटल कॉलेज में 2500 बीडीएस की सीटों पर प्रवेश दिया जाना है।

अगर ये कॉलेज दूसरे चरण की काउंसलिंग में शामिल होते हैं, तो लगभग 3300 अभ्यर्थियों को सीधे तौर पर फायदा होगा।

अभी तक सरकारी क्षेत्र के 12 मेडिकल कॉलेज की 1269 एमबीबीएस और केजीएमयू की डेंटल विंग की 51 सीटों पर ही प्रवेश दिया गया। पहले चरण की यूपी सीपीएमटी की काउंसलिंग में एक भी निजी मेडिकल कॉलेज एमबीबीएस की सीट पर प्रवेश के लिए शामिल नहीं हुआ।
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वहीं, केवल तीन डेंटल कॉलेज इसमें अंतिम दिन पहुंचे। कैरियर इंस्टिट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज लखनऊ, महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज कानपुर और आईडीएसटी मोदी नगर के केवल 36 सीटों पर ही प्रवेश हुआ था।
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कमाई बना असली वजह
महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि काउंसलिंग से प्राइवेट कॉलेजों की यह दूरी असल में कमाई के खेल से जुड़ी हुई है।

यह कॉलेज मुंहमांगी कीमत पर एमबीबीएस और बीडीएस में प्रवेश देते हैं। काउंसलिंग से प्रवेश लेने पर यह फायदा निजी कॉलेज को नहीं होता। काउंसलिंग में शामिल होने पर महानिदेशालय से तय फीस पर ही प्रवेश देना होगा।

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