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एक टीचर और 110 स्टूडेंट्स, कैसे हो पढ़ाई?

Thu, 25 Jul 2013 10:13 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 25 Jul 2013 10:13 AM IST
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many colleges in lucknow sans teachers

राजधानी में क्रिश्चियन, कालीचरण, खुनखुनजी और शशिभूषण कॉलेज में इकोनॉमिक्स विभाग एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है। एक ही शिक्षक फर्स्ट ईयर से लेकर थर्ड ईयर तक की पढ़ाई करवाता है।

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अन्य सभी विषयों में एक-एक शिक्षक पर 110 छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। ऐसे में डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्नातक व परास्नातक कक्षाओं की पढ़ाई मखौल बनकर रह गई है।
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यही कारण है कि ढंग से पढ़ाई नहीं हो पाती। शिक्षक भी ज्यादा काम की वजह से दिलचस्पी नहीं लेते और स्टूडेंट्स भी क्लास में नहीं आते। यही वजह है कि डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 70 प्रतिशत उपस्थिति पर ही छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का नियम कागजों में ही सिमटकर रह गया है।
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हाईकोर्ट में सुरेश पांडेय बनाम यूपी के फैसले में साफ-साफ कहा गया है कि स्नातक में सीटें बढ़ाकर दाखिला न लिया जाए क्योंकि शिक्षक-छात्र अनुपात लगातार बढ़ता जा रहा है।

इसके बाद राज्य सरकार ने अपनी ओर से सीटें बढ़ाने का आदेश देने से मना कर दिया है। हालांकि, इन कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्तियां कब होंगी, यह एक बड़ा सवाल है।

उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में इस समय न तो कोई अध्यक्ष है न ही पूरे सदस्य। अध्यक्ष सहित सात सदस्य होने चाहिए लेकिन केवल तीन ही हैं। राजधानी के डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों के 124 पद खाली चल रहे हैं।

लखनऊ यूनिवर्सिटी में शिक्षकों के लगभग 150 पद खाली चल रहे हैं जो प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों में सबसे ज्यादा है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर भी सवाल है।

लुआक्टा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मौलींदु मिश्रा कहते हैं कि जनवरी 2007 में डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों के 552 पदों का विज्ञापन निकाला गया था और उसके पांच साल बाद 2012 में भर्ती प्रक्रिया पूरी हो पाई।

इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि उच्च शिक्षा के प्रति सरकार कितनी गंभीर है। इस समय उच्च शिक्षा संस्थान शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। अभी यह विभाग मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास है।

ऐसे में हम उनसे मांग करेंगे कि वे उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में अध्यक्ष सहित अन्य सदस्यों की संख्या पूरी करें और शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।

शिक्षकों की भर्ती न होने से राजधानी में शिक्षक-छात्र अनुपात बुरी तरह बिगडकर 1: 110 हो गया है। उधर, लूटा के अध्यक्ष डॉ. विनोद सिंह का कहना है कि एक्ट में शिक्षकों के पदनाम बदले जाने हैं।


मुझे लगता है कि यह काम महीने भर में पूरा हो जाना चाहिए उसके बाद शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया एक-दो महीने में शुरू हो सकती है। उम्मीद है कि हमें जल्द नए शिक्षक मिलेंगे।

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