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लखनऊ विश्वविद्यालय आज मनाएगा 93वां स्थापना दिवस

Mon, 25 Nov 2013 12:30 PM IST
आशीष कुमार त्रिवेदी/लखनऊ
आशीष कुमार त्रिवेदी/लखनऊ Updated Mon, 25 Nov 2013 12:30 PM IST
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93rd foundation day of lu today

दुनिया में नाम रोशन करने वाला लखनऊ विश्वविद्यालय अवध के तालुकेदारों के सुनहरे ख्वाबों की तस्वीर है। सोमवार को 93वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा यह शिक्षण केंद्र प्रख्यात शिक्षाविदों की कर्मस्थली रहा है।

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साथ ही यहां से पढ़ कर निकले लोग आज दुनिया में नाम कमा रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा व भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.एस.आनंद जैसे लोगों ने यहां से शिक्षा ग्रहण की है।
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तो दूसरी ओर आचार्य नरेंद्र देव और राधाकमल मुखर्जी जैसे शिक्षकों ने यहां कुलपति का पद संभालकर संस्था को गौरव प्रदान किया है।

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गौरवशाली अतीत वाले इस विवि की स्थापना 25 नवंबर, 1920 को भारत के गर्वनर जनरल हरकोर्ट बटलर की ओर से लविवि एक्ट पर दस्तखत करने के साथ हुई थी।

तालुकेदारों की ख्वाहिश थी कि कॉल्विन कॉलेज में 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद अवध के होनहार लखनऊ में बेहतर उच्च शिक्षा ग्रहण करें। सपना साकार करने में मदद की सर हरकोर्ट बटलर ने।
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उस समय तालुकेदारों ने लविवि की ेस्थापना के लिए 30 लाख रुपये चंदा इकट्ठा किया था। कैनिंग कॉलेज और मेडिकल कॉलेज को विवि के मुख्य कॉलेजों के रूप में मान्यता दी गई।

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वहीं, आईटी कॉलेज को महिला शिक्षा के लिए संबद्ध कॉलेज की मान्यता मिली। शुरुआत में क्रिश्चियन कॉलेज में वाणिज्य की कक्षाएं तो चलती थीं, लेकिन मान्यता नहीं दी गई थी।

अब एलयू के दो कैंपस हैं, एक पुराना और दूसरा सीतापुर रोड स्थित नया परिसर। द्वितीय परिसर में लॉ और मैनेजेंट कोर्सेज की पढ़ाई के साथ-साथ गिरी लाल गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ भी चल रही है।


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इलाहाबाद विवि से सेवानिवृत्त रजिस्ट्रार ज्ञानेंद्र नाथ चक्रवर्ती को यहां का कुलपति बनाया गया था और उन्होंने 16 दिसंबर, 1920 को 3000 रुपये प्रतिमाह की तनख्वाह पर पांच वर्ष के लिए उन्होंने कार्यभार संभाला।

तनख्वाह का खर्च राजा महमूदाबाद मुहम्मद अली खान की अध्यक्षता में गठित समिति उठाती थी। वित्त सचिव आईसीएस ई.ए.एच ब्लंट विवि के पहले कोषाध्यक्ष नियुक्त हुए।

आगरा कॉलेज के मेजर टी.एफ.ओ. डोनेल की रजिस्ट्रार के पद पर 1200 रुपये प्रतिमाह तनख्वाह पर नियुक्ति हुई थी।

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